इंदौर: शराब दुकान पर हंगामा करने के मामले में सस्पेंड किए गए द्वारकापुरी थाने के प्रधान आरक्षक तन्मय तोमर की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे हथियार को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि वह पुलिस का सर्विस हथियार था या फिर निजी हथियार। पुलिस जांच में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि प्रधान आरक्षक के पास वह रिवाल्वर किस आधार पर थी.
मामला उस समय सामने आया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें प्रधान आरक्षक तन्मय तोमर शराब दुकान पर एक बदमाश महेश टोपी के साथ नजर आ रहा है. वीडियो में हंगामा और विवाद के दौरान उसके हाथ में रिवाल्वर जैसी वस्तु दिखाई दे रही है. वीडियो सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने प्रधान आरक्षक को निलंबित कर दिया और मामले की जांच एसीपी अन्नपूर्णा शुवेंद्र जोशी को सौंपी गई है.
पुलिस विभाग के नियमों के अनुसार प्रधान आरक्षक स्तर के कर्मचारियों को सामान्य तौर पर सर्विस रिवाल्वर जारी नहीं की जाती. एएसआई और उससे ऊपर के अधिकारियों को नियमित रूप से सर्विस हथियार उपलब्ध कराया जाता है. हालांकि विशेष अभियान या किसी कार्रवाई के दौरान टीम में शामिल पुलिसकर्मियों को हथियार दिए जा सकते हैं, जिसकी विभागीय रिकॉर्ड में एंट्री होती है. अब जांच का एक बिंदु यह भी है कि यदि तन्मय तोमर के पास सर्विस हथियार था तो वह किस आदेश और रिकॉर्ड के आधार पर दिया गया था.
वहीं यह भी जांच की जाएगी कि वीडियो में दिखाई दे रहा हथियार पुलिस विभाग का है या निजी. सूत्रों का कहना है कि वीडियो में दिखाई दे रहा हथियार सर्विस रिवाल्वर जैसा नहीं लग रहा है. हालांकि इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी. यदि हथियार अवैध पाया जाता है तो आर्म्स एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है. मामले में अब पुलिस अधिकारी वायरल वीडियो, हथियार की पहचान, विभागीय रिकॉर्ड और पूरे घटनाक्रम की जांच कर रहे हैं
