रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिकी सीनेट ने ‘सेंक्शनिंग रशिया एक्ट 2026’ पास किया है। इसके तहत भारत और चीन समेत पांच देशों पर 100% टैरिफ लगाने का कड़ा प्रावधान है।
वाशिंगटन, यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की आर्थिक घेराबंदी करने के लिए अमेरिका ने अब तक का सबसे सख्त कदम उठाया है। अमेरिकी सीनेट ने मंगलवार को भारी बहुमत से सेंक्शनिंग रशिया एक्ट 2026 को मंजूरी दे दी है।
इस विधेयक के कानून बनने के बाद भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान से होने वाले निर्यात पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाया जा सकता है। यह कदम उन देशों को लक्षित करने के लिए उठाया गया है जो रूस से बड़े पैमाने पर तेल और गैस का आयात कर रहे हैं।
जेलेंस्की की मौजूदगी में पास हुआ बिल
यह महत्वपूर्ण विधेयक दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा तैयार किया गया था, जिसे मंगलवार को सदन में पेश किया गया। दिलचस्प बात यह है कि जिस समय कैपिटल हिल में इस पर वोटिंग हो रही थी, उस वक्त यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की भी वहीं मौजूद थे।
विधेयक के पक्ष में 86 सीनेटरों ने मतदान किया, जबकि विरोध में केवल 12 वोट पड़े। इस कानून का मुख्य उद्देश्य रूसी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाना और उन देशों को रूसी ऊर्जा संसाधनों से दूर करना है जो अभी भी मास्को के साथ व्यापारिक रिश्ते बनाए हुए हैं।
भारत पर क्या होगा असर?
मौजूदा समय में भारत से अमेरिका जाने वाले सामानों पर करीब 10 फीसदी टैरिफ लागू है, जबकि चीन के लिए यह दर 12.5 फीसदी है। नए कानून के तहत इसे बढ़ाकर सीधे 100 फीसदी करने का प्रस्ताव है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ व्यापारिक तनाव के बावजूद इस सख्त विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रभावी होता है, तो अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की लागत दोगुनी हो जाएगी, जिससे निर्यात क्षेत्र को भारी नुकसान हो सकता है।
होर्मुज संकट के बीच नई टेंशन
यह टैरिफ बम ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्ग बाधित हैं। ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही रुकने से खाड़ी देशों से आने वाली तेल आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है।
पहले भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं खाड़ी देशों से पूरा करता था। आपूर्ति बाधित होने के कारण भारतीय तेल शोधन कंपनियों को विकल्प के तौर पर रूसी कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता बढ़ानी पड़ी है।
किसे मिल सकती है छूट?
हालांकि, विधेयक में राहत का एक छोटा रास्ता भी छोड़ा गया है। सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल के अनुसार, यदि कोई देश रूस के कुल गैस निर्यात का 15 फीसदी से कम हिस्सा खरीदता है, तो उसे इस भारी टैरिफ से छूट दी जा सकती है।
फिलहाल भारत, चीन और अन्य तीन देशों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है क्योंकि वे बड़े पैमाने पर रूसी ईंधन का आयात कर रहे हैं। अमेरिकी सीनेट के इस फैसले ने अब ग्लोबल ट्रेड वार की नई सुगबुगाहट तेज कर दी है।
