
ग्वालियर। अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के संभागीय अध्यक्ष बसंत पाराशर ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन , ग्वालियर के अध्यक्ष रह चुके एडवोकेट अनिल मिश्रा को ग्वालियर के ब्राह्मण समाज की ओर से समर्थन देते हुए कहा है कि जातिवादी राजनीति करने वाले कुछ समाजविरोधी विघ्नसंतोषी लोगों को खुश करने के लिए ग्वालियर के पुलिस प्रशासन ने एडवोकेट अनिल मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर समस्त ब्राह्मण समाज को चुनौती दे दी है। उन्होंने मांग की कि यह झूठी व एकपक्षीय एफआईआर तत्काल वापस ली जाए। प्रशासन यदि अब एडवोकेट मिश्रा के खिलाफ किसी भी तरह की प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करता है तो ग्वालियर का ब्राह्मण समाज चुप नहीं बैठेगा। प्रशासन ग्वालियर के ब्राहमण समाज की शक्ति को कम करके न आंके। यदि ब्राह्मण समाज के सम्मान पर चोट पहुंचाने की किसी ने कोशिश की तो सहन नहीं किया जाएगा।
ब्राह्मण नेता पाराशर ने कहा कि एडवोकेट अनिल मिश्रा के परिवार में 3 सदस्य हाईकोर्ट जज, सुप्रीम कोर्ट जज रह चुके हैं। उनके ताऊ दिवंगत हरगोविंद मिश्रा हाईकोर्ट जज रहे । एडवोकेट अनिल के चचेरे भाई अरुण मिश्रा पहले हाईकोर्ट जज फिर सुप्रीम कोर्ट जज रहे और वर्तमान में विशाल मिश्रा हाईकोर्ट जज हैं , जो रिश्ते में एडवोकेट अनिल मिश्रा के भाई हैं। एडवोकेट अनिल मिश्रा को पुलिस क्राइम ब्रांच ग्वालियर ने कल यानी 5 अक्टूबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 179 के तहत नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने के लिए कहा था। इसमें कहा गया था कि 5 अक्टूबर को प्रसारित वीडियो में आपने (एडवोकेट अनिल मिश्रा ) विभिन्न इलेक्ट्रोनिक मीडिया चैनलों को बाइट देते समय डॉ.भीमराव अम्बेडकर के संबंध में टिप्पणी की है, जो उपरोक्त संदर्भित आदेश का उल्लंघन है।
