पेपर लीक संशोधन विधेयक को सरकार ने बताया उपलब्धि, विपक्ष बोला विफलता छिपाने का प्रयास

नयी दिल्ली, 28 जुलाई (वार्ता) लोकसभा में मंगलवार को पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य को लेकर सत्ता पक्षा तथा विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई जिसमें सत्तापक्ष ने विधेयक को परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के हित में उठाया गया सख्त कदम बताया, जबकि विपक्ष ने इसे सरकार की विफलताओं को छिपाने का प्रयास करार देते हुए कहा कि समस्या कानून की नहीं, बल्कि शासन की मंशा और जवाबदेही की है।

भाजपा की बांसुरी स्वराज ने ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है और विद्यार्थी अब “एग्जाम वरियर से एग्जाम वारियर” बन गए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में मेडिकल कॉलेजों की संख्या दोगुनी हुई है, एम्स की संख्या सात से बढ़कर 20 हो गई है तथा विश्वविद्यालयों की संख्या में 60 प्रतिशत वृद्धि हुई है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री हर वर्ष ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हैं तथा सीयूईटी जैसी व्यवस्था से विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में 22 बार पेपर लीक हुए और कई कांग्रेस शासित राज्यों में भी ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। उनका कहना था कि मोदी सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी का गठन कर परीक्षाओं को निष्पक्ष बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।

तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी ने कहा कि विद्यार्थियों को निष्पक्ष परीक्षा मिलना उनका अधिकार है, लेकिन पेपर लीक रोकने के लिए केवल नया कानून बना देना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले सरकार को यह स्वीकार करना चाहिए कि वह पेपर लीक रोकने में विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हर विफलता के बाद कानून बदल देती है।

उन्होंने सवाल किया कि यदि सरकार मिसाइलों की निगरानी कर सकती है तो पेपर लीक क्यों नहीं रोक सकती। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में अनेक पेपर लीक हुए, लेकिन दोषियों को सजा नहीं मिली। उन्होंने सरकार पर छात्रों के आंदोलनों को बलपूर्वक दबाने और बेहतर शासन देने में असफल रहने का भी आरोप लगाया। द्रमुक के दयानिधि मारन ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में कई शिक्षा मंत्री बदले, लेकिन शिक्षा व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि पेपर लीक गंभीर समस्या है, जिस पर सरकार ने समय रहते ध्यान नहीं दिया। उनका आरोप था कि सरकार छात्रों और जनप्रतिनिधियों की बात सुनने को भी तैयार नहीं है।

तेलुगु देशम पार्टी के लवू श्री कृष्ण देवरायलु ने विधेयक में विशेष न्यायालयों के गठन के प्रावधान का स्वागत करते हुए कहा कि फोरेंसिक प्रयोगशालाओं में रिक्त पद शीघ्र भरे जाने चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर कोचिंग संस्थानों को विनियमित करने के लिए अलग कानून बनाने, विकेंद्रीकृत प्रश्नपत्र निर्माण प्रणाली विकसित करने तथा राज्यों के शिक्षकों को प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में शिक्षा क्षेत्र में अनेक सुधार हुए हैं।

शिवसेना के डॉ. श्रीकांत एकनाथ शिंदे ने कहा कि पेपर लीक से केवल एक छात्र नहीं, बल्कि पूरे परिवार का सपना टूटता है और इसी पीड़ा को समाप्त करने के लिए सरकार यह विधेयक लाई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मुद्दे को अपनी नैतिक जिम्मेदारी मानते हुए कठोर कानून बनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कोचिंग क्षेत्र को विनियमित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इसकी बाजार क्षमता 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि उसने छात्रों के आंदोलन का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास किया, लेकिन छात्रों ने उसका साथ नहीं दिया।

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