
नर्मदापुरम। मूंग की शत-प्रतिशत सरकारी खरीदी और खाद वितरण के लिए ई-टोकन व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर भोपाल कूच कर रहे किसानों ने सोमवार को नर्मदापुरम में पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ दी. नर्मदा ब्रिज पर पुलिस और किसानों के बीच आमना-सामना हुआ.इसी दौरान एक किसान भावुक होकर एसपी साईं कृष्णा एस. थोटा के पैरों में गिर पड़ा और बार-बार कहता रहा, हमारी बात मान लो… मूंग खरीद लो.
किसान की भावुक अपील पर एसपी ने उसे उठाकर गले लगाया और समझाने का प्रयास किया.आंदोलन के दौरान मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही. इस बीच क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष लीलाधर सिंह राजपूत को रिहा कर दिया गया. हालांकि, आंदोलन से जुड़े करीब 40 किसान नेता अब भी हिरासत या नजरबंद बताए जा रहे हैं.
किसानों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगे पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.
भोपाल कूच से पहले प्रशासन रहा हाई, नर्मदा ब्रिज के पहले चला घंटों टकराव
संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर सोमवार को प्रस्तावित भोपाल कूच और मुख्यमंत्री आवास घेराव को लेकर पूरे नर्मदापुरम संभाग में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट नजर आया. नर्मदापुरम, हरदा, इटारसी, डोलरिया, सिवनी मालवा और पिपरिया सहित कई क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया. प्रमुख मार्गों पर तीन-स्तरीय बैरिकेडिंग की गई, वाहनों की सघन जांच हुई और हर गतिविधि पर प्रशासन की पैनी नजर रही. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से करीब 40 किसान नेताओं को एहतियातन हिरासत में लिया गया या नजरबंद किया गया.
प्रशासन की सख्ती के बीच संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े करीब 700 किसान सुबह मां नर्मदा का पूजन-अर्चन और कथा करने के बाद भोपाल कूच के लिए रवाना हुए. किसानों के जत्थे को सबसे पहले भोपाल तिराहे पर रोक दिया गया, जहां करीब दो घंटे तक किसान और प्रशासन आमने-सामने डटे रहे. मौके पर कलेक्टर सोमेश मिश्रा और पुलिस अधीक्षक साईं कृष्णा ने किसानों से बातचीत कर उन्हें आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे.
बैरिकेडिंग तोड़ते हुए आगे बड़े किसान गाया राष्ट्र गान
जब प्रशासन की समझाइश बेअसर रही तो किसानों ने बैरिकेडिंग तोड़ते हुए आगे बढ़ने का प्रयास किया. इसके बाद पुलिस ने नर्मदा ब्रिज से पहले तीन लेयर की मजबूत बैरिकेडिंग लगाकर किसानों को रोक दिया. यहां भी किसानों और पुलिस के बीच काफी देर तक धक्का-मुक्की और तनावपूर्ण स्थिति बनी रही. बड़ी संख्या में किसानों ने बैरिकेड्स पार कर लिए, जबकि कई किसान पीछे ही रुक गए. लगभग एक घंटे बाद किसानों ने दोबारा आगे बढ़ने की कोशिश की, जिससे पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. इस दौरान किसानों ने राष्ट्र गान गाकर सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए. इस दौरान कमिश्नर, कलेक्टर, आई जी, डीआईजी और एसपी से किसानों कि लम्बी बात होती रही लेकिन किसान पैदल मार्च निकलने पर अड़े रहे.
इससे पहले प्रशासन ने हरदा जिले में 25 किसान नेताओं और पदाधिकारियों को हिरासत में लेकर अस्थायी जेल भेज दिया, जबकि नर्मदापुरम में 15 किसान नेताओं को नजरबंद कर दिया था, लेकिन दोपहर तक नर्मदापुरम के किसान नेता ही किसानों के बीच नजर आएं. जबकि अन्य क्षेत्रों के नेता नहीं दिखे. अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो.
पूरे दिन बंद रहा भोपाल रास्ता
भोपाल कूच को लेकर पूरे दिन जिले में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रही. भोपाल चौराहे पर बेरीकेट्स कर किसी को भी नहीं जाने दिया. ऐसे में कई लोगों को फोरलेन से चक्कर लगाकर बुदनी, भोपाल जाना पड़ा.
संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और आने-जाने वाले वाहनों की लगातार जांच की जाती रही. किसानों के बढ़ते आंदोलन और प्रशासन की सख्ती के बीच पूरे घटनाक्रम पर सभी की निगाहें टिकी रहीं. इस आई जी, डीआईजी सहित कई आला अधिकारी मौके पर रहे.
तीन स्थानों पर लगाए थे बेरीकेट्स
13 किसान संगठन को नर्मदापुरम जिले कि सीमा में रोकने तीन स्थानों पर बेरीकेट्स लगाए थे लेकिन किसानों ने तीनों स्थानों के बेरीकेट्स तोड़ भोपाल के लिए पैदल कूच किया. हालांकि किसानों के खाने पीने के सामान से भरे वाहनों को नर्मदा ब्रिज पार नहीं करने दिया गया. रात 8 बजे तक किसान बुदनी जिला सीहोर की सीमा में प्रवेश कर चुके थे.
कांग्रेससी भी रहे नजरबंद
किसानों के आंदोलन में शामिल होने आ रहे कांग्रेस के नेता भी नजरबंद रहे. उन्हें किसानों के आंदोलन में शामिल होने नहीं दिया. इस दौरान करीब 50 कांग्रेस के नेताओं को नजरबंद किया गया.
