
भोपाल। मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ ने प्रदेश सरकार से सरकारी सेवाओं में समानता एवं समकक्षता के सिद्धांत को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग करते हुए कहा है कि वेतनमान, सेवा शर्तों और पदोन्नति में असमानता ही विभिन्न कर्मचारी वर्गों के बार-बार होने वाले आंदोलनों का प्रमुख कारण है।
संघ के अध्यक्ष इंजी. सुधीर नायक ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि विभिन्न विभागों के कर्मचारी लंबे समय से अपनी न्यायोचित मांगों को लेकर आंदोलन करने को विवश हैं। इससे आम जनता को असुविधा होती है, शासकीय कार्य प्रभावित होते हैं तथा समय और संसाधनों की भी हानि होती है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग कर्मचारी वर्गों की समस्याएं भले ही भिन्न दिखाई देती हों, लेकिन उनका मूल कारण समान कार्य करने वाले कर्मचारियों के साथ असमान व्यवहार है।
संघ ने कहा कि विभिन्न विभागों में समान दायित्व निभाने वाले कर्मचारियों के वेतनमान, पदोन्नति के अवसर, सेवानिवृत्ति आयु तथा अन्य सेवा लाभों में व्यापक अंतर है। लिपिकीय कर्मचारियों, फार्मासिस्टों, निरीक्षकों, सर्वे कर्मचारियों, होमगार्ड तथा स्थायी कर्मियों के बीच भी समान योग्यता और कार्यभार के बावजूद असमानताएं बनी हुई हैं।
विज्ञप्ति में कहा गया कि इस विषय पर पूर्व में गठित कई समितियों और आयोगों ने भी विचार किया था। वर्ष 2018 के अग्रवाल आयोग ने आंशिक रूप से समानता की आवश्यकता स्वीकार की थी, लेकिन उसकी अनुशंसाओं का पूर्ण क्रियान्वयन अब तक नहीं हो सका है।
संघ ने सरकार से सभी विभागों में समानता के सिद्धांत को एकरूपता से लागू करने की मांग करते हुए कहा कि इससे कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित विवादों का समाधान होगा, आंदोलन कम होंगे और सुशासन को मजबूती मिलेगी।
