राष्ट्रीय कृषि विकास योजना की दूसरी किस्त की पात्रता हासिल करने वाला पहला राज्य बना महाराष्ट्र; चौहान की बधाई

नई दिल्ली, 27 जुलाई (वार्ता) केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को वीडियो कांफ्रेसिंग सुविधा के माध्यम से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के तहत जारी निधियों के उपयोग की समीक्षा की तथा महाराष्ट्र सरकार को योजना की दूसरी किस्त जारी करने का निर्णय किया। कृषि मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार बैठक में महाराष्ट्र सरकार के कृषि राज्य मंत्री दत्तात्रेय भरणे तथा केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा महाराष्ट्र सरकार के अधिकारी उपस्थित में महाराष्ट्र को दूसरी किस्त जारी करने का निर्णय किया गया।

समीक्षा के दौरान मंत्री श्री चौहान ने बताया कि सरकार ने पहले चरण में महाराष्ट्र को आरकेवीवाई के तहत 335 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की थी। राज्य सरकार ने इसमें से लगभग 260 करोड़ रुपये का उपयोग कर लिया है, जो निर्धारित 75 प्रतिशत उपयोग मानक से अधिक है। इस उपलब्धि के साथ महाराष्ट्र दूसरी किस्त प्राप्त करने के लिए पात्र बनने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। उन्होंने बताया कि 335 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। श्री चौहान ने महाराष्ट्र सरकार को बधाई देते हुए कहा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर 75 प्रतिशत से अधिक आरकेवीवाई निधि का उपयोग राज्य की कृषि विकास कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि समय पर धनराशि खर्च करने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सार्वजनिक धन का उपयोग केवल उन्हीं उद्देश्यों के लिए हो, जिनके लिए उसे स्वीकृत किया गया है। इसके लिए निरंतर निगरानी आवश्यक है। केंद्रीय मंत्री ने फार्मर आईडी (किसान पहचान पत्र) बनाने में महाराष्ट्र के प्रदर्शन की भी सराहना की। उन्होंने बाढ़ से प्रभावित किसानों को राज्य सरकार द्वारा त्वरित सहायता उपलब्ध कराने का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग 14,000 करोड़ रुपये की सहायता राशि मात्र पाँच दिनों के भीतर किसानों के बैंक खातों में सीधे हस्तांतरित की गई थी।

श्री चौहान ने आरकेवीवाई के विभिन्न घटकों की समीक्षा करते हुए समेकित बागवानी विकास मिशन  (एमआईडीएच) के अंतर्गत राज्य की संतोषजनक प्रगति की प्रशंसा की। साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र को डिजिटल कृषि, कृषि विस्तार, राष्ट्रीय बागवानी मिशन (एनएचएम), बीज, तिलहन तथा कृषि वानिकी जैसे घटकों में व्यय की गति तेज करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि बीज घटक के अंतर्गत लंबित देनदारियों का शीघ्र लेखांकन किया जाए, ताकि निधियों के उपयोग में और सुधार हो सके।बैठक के दौरान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन पर भी अलग से चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि फसल बीमा के लिए आवेदन करते समय किसानों द्वारा सही और पूर्ण जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) धारक और गैर-केसीसी किसान, दोनों ही फसल बीमा योजना का लाभ लेने के पात्र हैं। हालांकि, यदि कोई किसान अपने केसीसी की जानकारी छिपाकर किसी अन्य खाते के माध्यम से आवेदन करता है, तो ऐसी स्थिति से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि पोर्टल पर प्रस्तावित घोषणा का उद्देश्य केवल पारदर्शिता और सही जानकारी सुनिश्चित करना है, न कि किसी पात्र किसान को योजना के लाभ से वंचित करना। श्री चौहान ने कहा कि सरकार किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत ब्याज अनुदान और समय पर ऋण चुकाने पर प्रोत्साहन जैसी महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इसलिए सार्वजनिक संसाधनों के पारदर्शी और प्रभावी उपयोग के लिए सही जानकारी का खुलासा आवश्यक है। बैठक के अंत में केंद्रीय कृषि मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि महाराष्ट्र आरकेवीवाई के शेष घटकों में भी अपने प्रदर्शन में और सुधार करेगा तथा देश के कृषि क्षेत्र की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देता रहेगा।

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