भाजपा गुरु रविदास की जन्मस्थली से निकलेगी कलश यात्रा, 21,000 स्थानों पर ‘कलश वंदना’ कार्यक्रम

नयी दिल्ली 27 जुलाई (वार्ता) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गुरु रविदास की 650वीं जयंती को भव्य तरीके से मनाने की निर्णय लिया है। इसको लेकर पार्टी सात महीने तक देशभर में ‘संत गुरु रविदास जी महाराज समरस्य संकल्प अभियान’ चलाएगी। देशभर में 21,000 स्थानों पर ‘कलश वंदना’ कार्यक्रम का आयोजन करेगी। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और दुष्यंत कुमार ने सोमवार को पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन के दौरान यह जानकारी दी। श्री चुघ ने बताया कि कल यानी 28 जुलाई को वाराणसी में संत गुरु रविदास जी की जन्मस्थली पर 131 कलशों की पूजा होगी और एक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद 29 तारीख को उनकी जन्मस्थली की मिट्टी लेकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज और पार्टी नेतृत्व पूरे देश के लिए 131 कलशों की यात्रा को हरी झंडी दिखाएंगे।

उन्होंने बताया कि यह यात्रा देश के सभी राज्यों और सभी जिलों में जाएगी और देश भर में 21,000 स्थानों पर ‘कलश वंदना’ कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। ये कलश 10 सितंबर तक 21,000 स्थानों पर पहुँचेंगे। श्री चुघ ने बताया कि भाजपा ने संत गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती को ‘समरसता संकल्प अभियान’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। गुरु पूर्णिमा के शुभ दिन, यानी 29 जुलाई, 2026 से शुरू होकर 20 फरवरी, 2027 यानी गुरु रविदास जी की जयंती तक लगभग सात महीने तक ‘संत गुरु रविदास जी महाराज समरस्य संकल्प अभियान’ नाम से एक राष्ट्रीय अभियान चलाया जाएगा।

श्री कुमार ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि संत गुरु रविदास का जन्म वाराणसी में हुआ था और उन्होंने चित्तौड़गढ़ किले में मोक्ष प्राप्त किया था, जहाँ मीराबाई जी का मंदिर भी स्थित है। ऐसे समय में जब तैमूर, सिकंदर लोदी और तुगलक जैसे शासक पूरे देश में लोगों से जबरन इस्लाम धर्म कबुल करवा रहे थे, लोगों का धर्म परिवर्तन करवा रहे थे और मंदिरों को नष्ट कर रहे थे, तब उन्होंने “तलवार या कुरान!” का नारा दिया था। उन्होंने कहा कि अराजकता और उथल-पुथल के उस मध्ययुगीन दौर में भक्ति आंदोलन के महान संतों ने क्षेत्रीय भाषाओं में आम लोगों को जागरूक किया और देश को दिशा दिखाई। इसमें संत गुरु रविदास का बहुत बड़ा योगदान रहा। उस समय, कबीर दास जी ने उन्हें ‘संत शिरोमणि गुरु रविदास जी’ की उपाधि दी थी। संत गुरु रविदास जी ने उस समय एक मार्ग दिखाया था और कहा था, “अगर मैं सच का साथ नहीं छोड़ता, तो कुरान क्यों पढ़ूँ? भले ही मेरी गर्दन पर छुरी चल जाए, मैं वेदों में अपनी आस्था नहीं छोड़ूँगा।”

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