
इंदौर. जेलों में बंद कैदियों के न्यायालयीन मामलों में पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं की पहचान अब पूरी तरह सत्यापित की जाएगी. जेल प्रशासन ने व्यवस्था में बदलाव करते हुए वकालतनामा जमा करने के साथ अधिवक्ताओं से पहचान पत्र और बार काउंसिल की सनद की प्रति लेना अनिवार्य कर दिया है.
नए निर्देश के बाद अब जेलों में बंद किसी भी कैदी के प्रकरण में पैरवी के लिए आने वाले वकील को सिर्फ वकालतनामा प्रस्तुत करना पर्याप्त नहीं होगा. उसे आवेदन पत्र के साथ अपना परिचय पत्र और अधिवक्ता के रूप में पंजीयन प्रमाण पत्र भी देना होगा. जेल प्रशासन ने यह आदेश प्रदेश की सभी जेलों के अधिकारियों को जारी कर दिया है. दरअसल, जेलों में बंद बंदियों से अधिवक्ता मुलाकात कर उनके मामलों की जानकारी लेते हैं और न्यायालयीन पैरवी की तैयारी करते हैं. नई व्यवस्था के तहत जेल प्रशासन अब यह सुनिश्चित करेगा कि बंदियों से मिलने और उनके प्रकरणों में पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं का रिकॉर्ड भी उपलब्ध रहे. जेल अधिकारियों के मुताबिक यह प्रक्रिया सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और जेल में होने वाली प्रत्येक अधिकृत मुलाकात का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने के उद्देश्य से लागू की गई है.
