सीहोर। मानसून विदा होने से पहले जिले में बारिश का दौर जारी है. शनिवार रात से शुरू हुई बरसात ने कहीं तेज तो कहीं हल्की बूंदें बरसाई. रविवार सुबह 8 बजे तक सीहोर शहर में 27.1 मिमी यानी एक इंच से अधिक बारिश दर्ज हुई. वहीं नर्मदा किनारे बुदनी में 54.6 मिमी, भैरूंदा में 43 मिमी, रेहटी में 41 मिमी, आष्टा में 30 मिमी, जावर में 18 मिमी और सीहोर में 15.3 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई.
जिले में पानी की दरकार तो है, लेकिन इस समय हो रही बारिश फसलों के लिए मुसीबत साबित हो रही है. खेतों में पानी भर गया है और कटी पड़ी सोयाबीन खराब होने लगी है. बारिश के बाद धूप निकलने से फलियों के फूटने और दाना गिरने की संभावना बढ़ गई है. इससे सोयाबीन दागी होने या फली में ही अंकुरित होने का खतरा है, जिससे किसानों को उपज का सही दाम नहीं मिल पाएगा.
मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक हल्की बारिश और उसके बाद फिर तेज वर्षा की संभावना जताई है. यदि ऐसा हुआ तो सोयाबीन की फसल पूरी तरह से खराब हो सकती है.
जिले में इस बार 3.20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बोवनी हुई थी. शुरुआती बारिश अच्छी रही, लेकिन बीच में खेंच से फली कम आई। इसके बाद लगातार हो रही बारिश ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी. पहले हुए नुकसान के लिए सर्वे शुरू हुआ था, मगर अब ताजा हालात ने उस सर्वे को बेकार कर दिया है और फिर से दोबारा सर्वे कराने की स्थिति बन गई है.
अब तक जिले में 1042.2 मिमी बारिश दर्ज हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 1104.2 मिमी और सामान्य औसत 1148.4 मिमी रहती है. औसत कोटा पूरा करने के लिए अभी 106 मिमी वर्षा की आवश्यकता है, नहीं तो पीने के पानी की समस्या खड़ी हो सकती है. लेकिन यदि बारिश और बढ़ी तो सोयाबीन की कटाई प्रभावित होगी, हार्वेस्टर चलाना मुश्किल हो जाएगा और दाने दागी होकर खेत में बिखर जाएंगे.
इनका कहना है
इन दिनों बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम सक्रिय हुआ है. इसके असर से ही बारिश हो रही है. इस सिस्टम को अरब सागर और महाराष्ट्र से भी सपोर्ट मिल रहा है. ऐसे में दो दिन और तेज बारिश होने की संभावना है. पिछले 13 साल का ट्रेंड देखें तो अधिकांश सालों में अक्टूबर के पहले सप्ताह में ही मानसून की विदाई हो जाती है. इस साल भी ऐसी ही स्थिति बनती दिख रही है.
डॉ. एसएस तोमर,
मौसम वैज्ञानिक, आरएके
