आयुष्मान की टीम शहर में, अस्पतालों में मचा हड़कंप

ग्वालियर: आयुष्मान कार्ड से इलाज करने में आना-कानी करने वाले तथा इससे धांधली करने वाले प्राइवेट अस्पताल संचालकों में शुक्रवार को हड़कंप मचा रहा। कारण था कि तमाम शिकायतें मिलने के बाद भोपाल से आयुष्मान विभाग की 10 सदस्यीय टीम का शहर में पहुंचना। टीम शहर में है इसकी जानकारी लीक हो गई, इसके बाद प्लान बदल दिया गया। टीम को सुबह निरीक्षण करना था, लेकिन टीम कहां किस अस्पताल में पहुंचेगीं इसे लीक नहीं किया जा रहा।
पहुंची हैं शिकायतें
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान कार्ड से गरीबों का 5 लाख रुपए तक का निःशुल्क इलाज होना है पर प्राइवेट अस्पताल संचालक पूरी तरह से पानी फेरने का काम कर रहे हैं। जहां इसके तहत इलाज किया जा रहा है, वहां मरीजों से अलग से राशि ली जा रही है। बहुत से अस्पताल आयुष्मान कार्ड को मान्य नहीं करते हुए इलाज करने से मना कर रहे हैं। बहुत से ऐसे अस्पताल हैं जो पैकेज न होने के कारण हार्ट, किडनी, लिवर सहित अन्य बीमारियों का इलाज करने से मना कर देते हैं। इसके अलावा भी अन्य शिकायतें हैं जो सरकार तक जापहुंची हैं।
इलाज न होने की शिकायतों के बाद आई है टीम
आयुष्मान विभाग की 10 सदस्यीय टीम का निरीक्षण कार्यक्रम लंबा चलने वाला है। टीम किस अस्पताल में पहुंचेगी इसकी भनक किसी को नहीं लगने दी जा रही है। जो जानकारी सामने आई है उसके अनुसार टीम शहर में दो से तीन दिन तक रुकेगी और हालातों का जायजा लेगी। हालांकि यह अलग बात है कि जैसे ही टीम एक अस्पताल पहुंची वहां से मैसेज सभी अस्पताल संचालकों तक पहुंच गया, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जिनका इलाज आयुष्मान कार्ड से हो रहा है, उनकी फाइलें सही करवाई जाने लगीं। मरीजों के परिजनों को अस्पताल से बाहर भगा दिया कि कहीं वह रुपयों के लेन-देन की शिकायत टीम से न कर दें।
ऐसे होता है सौदा
मरीज के परिजन से वह डॉक्टर सौदा करता है, जिसे उसका इलाज करना होता है। इसमें सरकारी डॉक्टर भी शामिल हैं। मरीज के परिजनों से कहा जाता है कि आयुष्मान कार्ड से इलाज तो होगा, लेकिन हमारी फीस अलग से देनी होगी। जबकि आयुष्मान कार्ड से पूरा इलाज यहां तक कि अगले 15 दिन तक का पूरा इलाज निःशुल्क रहता है। इलाज करने वाला डॉक्टर चाहे वह सरकारी हो या प्राइवेट नकद राशि लेता है। अगर कोई ऑनलाइन राशि ट्रांसफर करना चाहे तो फिर किसी ऐसे व्यक्ति का अकाउंट बताया जाता है जिसका इलाज कर रहे अस्पताल संचालक से दूर-दूर तक वास्ता नहीं होता। हालांकि वह परिचित एक-दूसरे से बहुत अच्छे से रहते हैं।

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