विंध्य की डायरी
डा. रवि तिवारी
राजनीति में कोई किसी का न तो स्थाई दोस्त होता और न ही दुश्मन, यह भी सही है कि राजनीति में पल-पल परिस्थितियां बदलती रहती है , जिसको विधायक ने नगर पंचायत अध्यक्ष बनवाया आज वही विधायक को हद में रहने के साथ मुंह न खुलवाने का अल्टीमेटम दे रहे है. दरअसल रीवा के नगर परिषद गुढ़ में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रूप ले चुका है. भाजपा नेत्री एवं नगर पंचायत अध्यक्ष डा. अर्चना सिंह ने अपनी ही पार्टी के गुढ़ भाजपा विधायक नागेन्द्र सिंह पर कई गंभीर आरोपों की बौछार कर दी.
दावा किया कि उनके खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव राजनीतिक षडयंत्र का हिस्सा है और इसके पीछे विधायक की भूमिका है. कभी विधायक की करीबी रहीं अर्चना सिंह ने अल्टीमेटम के साथ यह भी कहा कि विधायक ने अपनी सीमाएं पार की तो मेरे पास बहुत कुछ है बोलने और दिखाने के लिये, तब शायद विधायक मुंह दिखाने के लायक भी नही रहेगें. अब सवाल यह उठता है कि ऐसा क्या है? भाजपा के अंदर इस तरह की धमकी भरी लड़ाई शायद अनुशासन की बेड़ी को तोड़ कर शुरू हुई है. संगठन क्या संज्ञान लेगा यह तो वक्त बताएगा पर आरोपों पर विधायक का कहना है ,आरोप नहीं सबूत हो तो देना चाहिए, राजनीति में यह सब चलता रहता है. यदि कोई प्रमाण सामने आएगा तो उसके आधार पर उसका जवाब भी देगें. भाजपा के अंदर अब पार्टी फोरम में बात रखने के बजाय खुलकर लड़ाई आमने-सामने होने लगी है पार्टी की साख पर भी सवाल है?
कांग्रेस में उपेक्षा से बगावत की राह
रीवा में कांग्रेस के अंदर इस समय आंतरिक गुटबाजी और बगावत खुलकर सामने आ चुकी है. वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच लगातार मतभेद देखे जा रहे है. शायद संगठन से ऊपर नेता और कार्यकर्ता अपने को समझने लगे है. संगठन सृजन अभियान के मंथन से कुछ नही निकला. छत्रपों की राजनीति और गुटबाजी अपने चरम पर है. प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी से लेकर प्रदेश प्रभारी तक रीवा में मंच से संगठन की मजबूती और एकता का पाठ मास्टर साहब बनकर पढ़ाया था. जिसका परिणाम अब सामने दिखने लगा है, संगठन के विपरीत कांग्रेस के पदाधिकारी और कार्यकर्ता आचरण कर रहे है.
लेकिन इन पर संगठन का चाबुक नही चल रहा है. मजे की बात यह है कि हाल ही में नाराज चल रहे कांग्रेसी ‘स्नेह मिलन एवं जन संवाद’ कार्यक्रम के बहाने बगावत का संदेश देते हुए अपनी एकता दिखाई है. दरअसल इस कार्यक्रम को जिला-शहर कांग्रेस कमेटी ने अनाधिकृत बताया था. मंच के माध्यम से नाराज कांग्रेसियों ने अपनी भड़ास नेताओं और संगठन पर निकाली और कांग्रेस को मजबूत बनाने का आवाहन भी किया. अब सवाल यह उठता है कि ऐसे में कांग्रेस कहां मजबूत होगी. संगठन के विपरीत जाकर नाराज कांग्रेसी पार्टी के अनुशासन को ठेंगा दिखा रहे हैं क्या इस पर प्रदेश या जिला संगठन कोई कार्यवाही करेगा? या फिर ऐसे ही संगठन की मर्यादा का चीरहरण होते धृतराष्ट्र की तरह देखते रहेंगे. कार्यक्रम में अधिकांश वही कांग्रेसी थे जो संगठन मुंह फुला कर चल रहे हैं .
बड़े फेर बदल के संकेत
लम्बे इंतजार के बाद पदोन्नति कर्मचारियों की हुई है, जिसके बाद अब फेर बदल की चर्चाएं भी तेज हो गई है. पदोन्नति के बाद रिक्त हुए पदों पर नई पदस्थापना एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है. ऊर्जाधानी में प्रभारी मंत्री के दौरे को लेकर बड़ा फेर बदल होने के संकेत है. खासकर पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है. पुलिस विभाग के अंदर संभावित सूची को लेकर चर्चाओं का दौर लगातार जारी है. विपक्षी दल संभावित तबादलों और पदस्थापनाओं को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे है. आरोप है कि तबादला प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिये और इसमें किसी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नही होना चाहिये. विपक्ष इसे आगामी दिनों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी में दिखाई दे रहा है. उधर मनचाही जगह पदस्थापना पाने के लिये हर कोई अपने स्तर पर प्रयास में लगा हुआ है
