ब्राजील सरकार ने चुनाव में संभावित अमेरिकी दखल को रोकने के लिए ट्रंप प्रशासन के दो बड़े अधिकारियों को वीजा देने से साफ इनकार कर दिया है। यह एक बहुत बड़ा कूटनीतिक कदम है।
ब्रासीलिया, ब्राजील ने ट्रंप प्रशासन के दो बड़े अधिकारियों को वीजा देने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है। इन दोनों अमेरिकी अधिकारियों पर देश की चुनावी व्यवस्था और प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाने की बड़ी साजिश रचने का आरोप लगा है। सूत्रों के अनुसार यह माना जा रहा था कि अमेरिकी अधिकारियों का यह ब्राजील दौरा अक्टूबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को सीधे तौर पर प्रभावित करने की कोशिश थी। यह चुनाव वामपंथी राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा और ट्रंप समर्थक फ्लावियो बोल्सोनारो के बीच होगा।
वीजा आवेदन खारिज होने वाले इस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में डेमोक्रेसी, ह्यूमन राइट्स एंड लेबर के सहायक सचिव रिले एम. बार्न्स शामिल थे। उनके साथ डिप्टी असिस्टेंट सेक्रेटरी सैमुअल सैमसन भी ब्राजील जाने वाले थे, लेकिन शुक्रवार को उनके वीजा आवेदन ठुकरा दिए गए। एक ब्राजीलियाई अधिकारी ने बताया कि वीजा आवेदन खारिज करने का यह बड़ा फैसला खुफिया सबूतों के आधार पर लिया गया है। ये सबूत पूरी तरह से यह इशारा करते हैं कि वे चुनावी व्यवस्था को कमजोर करने और राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहे थे।
ट्रंप का लैटिन अमेरिका में दखल
ब्राजील के इस बड़े चुनाव में हस्तक्षेप की यह सनसनीखेज कोशिश ऐसे समय में सामने आई है जब ट्रंप प्रशासन लैटिन अमेरिका में सक्रिय है। डोनाल्ड ट्रंप लैटिन अमेरिका के कई देशों में लगातार राजनीतिक घटनाक्रम को अपने अनुसार प्रभावित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। ट्रंप ने हाल ही में कोलंबिया के राष्ट्रपति अबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला और अर्जेंटीना के जेवियर मिलेई का भी खुलकर समर्थन किया था। इससे पहले वे चिली के जोस एंटोनियो कास्ट जैसे दक्षिणपंथी नेताओं का भी मंच से बहुत ही खुलकर अपना समर्थन कर चुके हैं।
बोल्सोनारो परिवार का चुनावी इतिहास
ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो ने साल 2022 के चुनाव से पहले देश की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग व्यवस्था पर बार-बार सवाल उठाए थे। जायर बोल्सोनारो की यह पूरी रणनीति अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा साल 2020 के चुनाव के बाद अपनाए गए रुख से बिल्कुल मिलती है। उस ऐतिहासिक चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा ने बड़ी जीत दर्ज की थी जिसके बाद बोल्सोनारो को 2030 तक चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया गया। बाद में बोल्सोनारो को सत्ता में बने रहने की साजिश के आरोप में 27 साल की जेल हुई और वह हाउस अरेस्ट में हैं।
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग पर फिर उठे सवाल
अब ब्राजील में नए चुनावी चक्र की शुरुआत के साथ ही फ्लावियो बोल्सोनारो अपने पिता की पुरानी राजनीतिक विरासत को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने देश की चुनावी व्यवस्था को लेकर सोशल मीडिया पर एक बार फिर से भारी संदेह फैलाना शुरू कर दिया है।
फ्लावियो ने विदेशी सरकारों से ब्राजील के चुनावों की निगरानी के लिए अपने पर्यवेक्षक भेजने की एक बहुत बड़ी अपील की है। हालांकि ब्राजील की चुनावी अदालत ने वोटिंग मशीन में किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी होने की सभी बातों को सिरे से खारिज किया है।
