सीतारमण ने 167 आयकर दिवस पर विभाग विभाग के लिए सुझाए सात व्यापक सिद्धांत

नयी दिल्ली, 24 जुलाई (वार्ता) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर विभाग के लिए निरंतर सुधार की संस्कृति अपनाने, जनता के बीच और मजबूत विश्वास जमाने, प्रौद्योगिकी के दायित्वपूर्ण उपयोग और स्वैच्छिक अनुपाल की व्यवस्था अधिक सुदृढ करने सहित आयकर विभाग के लिए सात व्यापक सिद्धांत सुझाए हैं। उन्होंने विभाग से आयकर रिफंड में और शीघ्रता लाने की जरूरत पर भी बल दिया है।

श्रीमती सीतारमण ने शुक्रवार को 167 वें आयकर दिवस के अवसर पर विज्ञान भवन में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा, ”मैं विभाग को स्वैच्छिक कर अनुपालन को और मजबूत बनाने, करदाताओं के अनुभव को और सरल एवं सहज बनाने, क्रियान्वयन स्तर पर कर संबंधी निश्चितता को और सुदृढ़ करने, प्रौद्योगिकी का जिम्मेदारीपूर्वक और प्रभावी उपयोग करने, संस्थागत उत्कृष्टता का निर्माण करने, जनता का विश्वास और अधिक मजबूत करने तथा निरंतर सुधार की संस्कृति अपनाने- इन सात व्यापक सिद्धांतों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहूँगी।”

उन्होंने कहा कि ये सभी प्राथमिकताएँ एक-दूसरे को मजबूत करती हैं। इस अवसर पर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन रवि अग्रवाल, बोर्ड अन्य सदस्य, वित्त मंत्रालय एवं आयकर विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

वित्त मंत्री ने कहा , ”आयकर विभाग की 167 वर्षों की इस यात्रा का उत्सव केवल उपलब्धियों पर विचार करने का अवसर नहीं है, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने का भी अवसर है। आने वाले दो दशकों में हमारा सामूहिक लक्ष्य विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में आयकर विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। विभाग व्यवसाय करने में सुगमता बढ़ाने, कर अनुपालन को प्रोत्साहित करने और करदाताओं तथा सरकार के बीच विश्वास को मजबूत करने में अहम योगदान देगा।”

आयकर विभाग की जिम्मेदारी अब केवल कर संग्रह तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह निष्पक्षता, दक्षता, व्यापार सुगमता और बेहतर सेवाएँ प्रदान करने तक विस्तृत हो चुकी है। विभाग का मुख्य फोकस अब करदाता सेवाओं में सुधार पर है।

उन्होंने कहा कि आयकर अधिनियम, 2025 के लागू होने से कानून को पुनर्गठित कर अधिक सरल बनाया गया है, जिससे अनिश्चितता कम हुई है और अनुपालन लागत में भी कमी आई है। इसके साथ ही ई-फाइलिंग पोर्टल की कंप्यूटिंग क्षमता, स्टोरेज, बैंडविड्थ और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में उल्लेखनीय सुधार किया गया है।

श्रीमती सीतारमण ने बताया कि इन सुधारों के कारण पोर्टल एक ही दिन में एक करोड़ से अधिक करदाताओं के साथ संवाद-सम्पर्क करने में समर्थ हुआ है। व्यस्ततम दिनों में यह संख्या लगभग 1.6 करोड़ तक तक चली गयी है।

उन्होंने बताया कि 21 जुलाई तक 3.2 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल किए जा चुके हैं, जिनमें से लगभग 94 प्रतिशत का सत्यापन और 60 प्रतिशत का प्रसंस्करण पूरा हो चुका है। इसी अवधि में 1.3 करोड़ से अधिक रिफंड दावे प्राप्त हुए हैं, जिनमें 96 प्रतिशत का सत्यापन और 40 प्रतिशत का निपटान हो चुका है।

उन्होंने कहा, ‘ विभाग को रिफंड प्रसंस्करण की समय-सीमा को और कम करने का प्रयास जारी रखना चाहिए क्योंकि समय पर रिफंड मिलने से करदाताओं का कर प्रशासन पर विश्वास बढ़ता है और उनकी वित्तीय तरलता भी बेहतर होती है।”

उन्होंने वित्तीय वर्ष 2025-26 में सीपीग्राम्स के माध्यम से प्राप्त लगभग 78,000 शिकायतों में से 94 प्रतिशत का निस्तारण किये जाने की उपलब्धि पर प्रसन्नता जतायी। वित्त मंत्री ने कहा कि शिकायतों के औसत निस्तारण का समय 57 दिनों से घटकर 28 दिन रह गया। अब 67 प्रतिशत शिकायतें 21 दिनों के भीतर निस्तारित कर दी जा रही हैं। इसी तरह वहीं ई-निवारण प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्राप्त 3.5 लाख शिकायतों में से 95 प्रतिशत का निस्तारण किया गया तथा औसत समय घटकर 42 दिन रह गया।

वित्त मंत्री ने आयकर अधिकारियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता , डेटा एनालिटिक्स, फोरेंसिक अकाउंटिंग, अंतरराष्ट्रीय कराधान, ट्रांसफर प्राइसिंग, डिजिटल एसेट्स, साइबर सुरक्षा और उन्नत वित्तीय जांच जैसे क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण दिलाने का भी सुझाव दिया। उनका कहना था कि अधिकारियों के लिए संरचित नेतृत्व विकास का नियमित प्रशिक्षण भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि विभाग का दीर्घकालिक लक्ष्य ‘मुकदमेबाजी प्रबंधन’ से आगे बढ़कर ‘मुकदमेबाजी की रोकथाम’ होना चाहिए। इसके लिए परिपत्रों को समय से जारी कर करदाताओं की जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया जाना चाहिए । आयकर के सभी न्यायिक क्षेत्रों में कानून की व्याख्या एक समान होनी चाहिए और अपीलीय आदेशों से सीख लेकर भविष्य के सुधारों के लिए संस्थागत ज्ञान का निरंतर विकास किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मामलों के निपटान में प्रगति हुई है और कुल लंबित मामलों में 34,000 से अधिक की कमी आई है तथा लंबित अपीलों की संख्या 5.4 लाख रह गई है।

वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि बजट 2024-25 में घोषित अपील की संशोधित मौद्रिक सीमा के अनुसार विभाग ने 6,000 अपीलें वापस ले ली हैं, जिससे महत्वपूर्ण कानूनी मामलों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा।

उन्होंने कार्यस्थल में सुधार और कार्यबल में उत्साह बढाने की दिशा में विभाग की प्रगति की भी सराहना की पिछले एक साल में मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, नोएडा सहित कई स्थानों पर नए कार्यालय परिसरों और आधुनिकीकरण परियोजनाओं में अच्छी प्रगति हुई है।

उन्होंने कहा कि वह दो दिन बाद मुंबई में नए ‘आयकर सिंधु’ कार्यालय परिसर का उद्घाटन करने जा रही हैं जो विश्वस्तरीय बुनियादी ढाँचा विकसित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। वित्त मंत्री ने कहा कि आयकर अधिनियम, 2025 का लागू होना विभाग की इस गौरवशाली यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा , ” हमें अपनी उपलब्धियों पर रुकना नहीं चाहिए। मैं विभाग से आग्रह करती हूँ कि वह उत्तरदायी कर प्रशासन के 5 आर सिद्धांतों -रिकॉग्नीशन (पहचानना), रेस्पांड (तत्काल प्रतिक्रिया देना), रिड्रेस (समाधान करना), रिफ्लेक्ट (आत्ममंथन करना) और सुधार (सुधार )- पर विशेष ध्यान देना चाहिए।”

श्रीमती सीतारमण ने 167वें आयकर दिवस के अवसर पर विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को राष्ट्र की सेवा में उनके समर्पित योगदान के लिए हार्दिक धन्यवाद और शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।

 

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