
ग्वालियर। शहर के सराफा बाजार स्थित ‘गहना जेम्स एंड ज्वेलर्स प्राइवेट लिमिटेड’ में एक ठग द्वारा साइबर ठगी के पैसों से 50 ग्राम सोने का सिक्का खरीदने का अजीबोगरीब मामला सामने आया है। आरोपी ने ज्वेलर्स को ऑनलाइन पेमेंट कर सिक्का तो खरीद लिया, लेकिन बाद में बेंगलुरु पुलिस का नोटिस मिलने और खाता होल्ड होने पर पूरे मामले का खुलासा हुआ। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।
माधव नगर झांसी रोड निवासी 40 वर्षीय अजय मंगल पुत्र राकेश मंगल सराफा कारोबारी हैं और सराफा बाजार में ‘गहना जेम्स एंड ज्वेलर्स प्राइवेट लिमिटेड’ का संचालन करते हैं। वह अपने शोरूम पर थे, तभी वहां अभिषेक परिहार नाम का एक व्यक्ति पहुंचा। उसने 50 ग्राम वजनी सोने का सिक्का खरीदने का सौदा तय किया और एडवांस के तौर पर 1 लाख रुपये एनईएफटी व 10 हजार रुपये आईएमपीएस के जरिए कारोबारी के बैंक खाते में जमा कराए।
इसके अगले दिन 5 अप्रैल को आरोपी पुनः दुकान पर आया और बाकी रकम चुकाते हुए 5 लाख रुपये व 1.41 लाख रुपये बैंक ट्रांसफर से जमा किए तथा 52,900 रुपये नकद दिए। कारोबारी ने नियमानुसार पक्का जीएसटी बिल जारी कर उसे सोने का सिक्का सौंप दिया।
*अकाउंट हुआ होल्ड, तब चला ठगी का पता:*
सब कुछ सामान्य चल रहा था कि अचानक कारोबारी का अकाउंट होल्ड हो गया। बैंक ने ईमेल के जरिए जानकारी दी कि उनके खाते में जमा कराई गई 5.10 लाख रुपये की राशि को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल द्वारा होल्ड कर दिया गया है।
इसके बाद बेंगलुरु साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन से एक सरकारी नोटिस उनके शोरूम पर पहुंचा। नोटिस से स्पष्ट हुआ कि आरोपी अभिषेक परिहार द्वारा सोने का सिक्का खरीदने के लिए दिए गए 5 लाख 10 हजार रुपये साइबर ठगी की गई राशि से जुड़े हैं और आरोपी जिस गैंग से जुड़ा है, वह करीब 24 करोड़ रुपये की साइबर ठगी में शामिल है।
साइबर ठगी के इस जाल में फंसने का अहसास होते ही सराफा कारोबारी अजय मंगल तुरंत कोतवाली थाने पहुंचे और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
जांच के दौरान पुलिस को एक आधार नंबर मिला है, जिससे कथित आरोपी अभिषेक परिहार की पहचान बहौड़ापुर के घोसीपुरा निवासी युवक के रूप में हुई है। सीएसपी लश्कर किरण अहिरवार ने बताया कि पुलिस की एक टीम आरोपी की तलाश के लिए घोसीपुरा जाने की तैयारी कर रही है। हालांकि, ज्वेलर्स की दुकान पर लगे सीसीटीवी कैमरों का बैकअप 15 से 20 दिन का होने के कारण फिलहाल संदेही आरोपी के फुटेज नहीं मिल पाए हैं, लेकिन पुलिस सरगर्मी से उसकी तलाश में जुटी है।
