जबलपुर: भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास के इलाकों में आज भी दूषित भूजल की आपूर्ति होने के आरोपों को मप्र हाईकोर्ट ने बेहद गंभीरता से लिया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को एक विशेषज्ञ समिति गठित कर किसी प्रामाणिक टेस्टिंग लैब से पानी के नमूनों की वैज्ञानिक जांच कराने के कड़े निर्देश जारी किये है। युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई तीन सितंबर को निर्धारित की गई है।
यह आदेश वर्ष 2004 से लंबित एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया गया, जिसे मूल रूप से स्वर्गीय आलोक प्रताप सिंह द्वारा दायर किया गया था। मामले की सुनवाई दौरान हस्तक्षेपकर्ताओं ने अदालत के समक्ष यह मुद्दा उठाया कि यूनियन कार्बाइड परिसर से जहरीले कचरे को हटाए जाने के दावों के बावजूद, आसपास के कई वार्डों में आम जनता को अब भी दूषित और जहरीला पानी मिल रहा है।
इससे स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा बना हुआ है। हाईकोर्ट ने इन आरोपों को स्वास्थ्य के लिए बेहद चिंताजनक मानते हुए निर्देश दिया है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के जरिए पानी के सैंपल ले और उनकी विस्तृत जांच रिपोर्ट 13 अगस्त तक अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई तीन सितंबर को निर्धारित की है। जांच रिपोर्ट के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई और आवश्यक निर्देश जारी करेगी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता खालिद नूर फखरुद्दीन ने पक्ष रखा
