माकपा ने वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई में भारत की चुप्पी पर की केंद्र की आलोचना की

नयी दिल्ली, 05 जनवरी (वार्ता) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने वेनेजुएला घटनाक्रम पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के रूख की सोमवार को आलोचना करते हुए इसे ‘शर्मनाक’ तथा ‘अमेरिकी समर्थक’ करार दिया है। गौरतलब है कि अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को बंधक बना लिया है और अमेरिकी सैनिक उन्हें अमेरिका लेकर गये हैं। माकपा ने केंद्र सरकार पर राष्ट्रीय संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति भारत की लंबे समय से चली आ रही प्रतिबद्धता का त्याग करने का आरोप लगाया है। माकपा पोलित ब्यूरो द्वारा जारी एक बयान में सोमवार को कहा गया कि विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया ( जिसमें केवल “गहरी चिंता” व्यक्त की गई और बातचीत का आह्वान किया गया) भारत के पारंपरिक विदेश नीति सिद्धांतों से बहुत कमतर है। पार्टी ने कहा, “संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के घोर उल्लंघन के बारे में निंदा का एक भी शब्द नहीं कहा गया है।”

माकपा ने कहा है कि अमेरिका के कुछ यूरोपीय सहयोगियों ने भी अमेरिकी कार्रवाई की खुले तौर पर आलोचना की है। अमेरिकी अभियान को ‘खुला हमला’ बताते हुए, वामपंथी पार्टी ने केंद्र सरकार पर एक ऐसा रुख अपनाने का आरोप लगाया जो ‘कायरतापूर्ण और राष्ट्रों की स्वतंत्रता और संप्रभुता की रक्षा के भारत के लंबे समय से चले आ रहे रुख के विपरीत’ है।” बयान में कहा गया है, “श्री मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की प्रतिक्रिया भारत के ब्रिक्स के् साझेदारों जैसे ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका द्वारा अपनाए गए रुख के बिल्कुल विपरीत है, जिन्होंने अमेरिकी आक्रामकता की स्पष्ट रूप से और दृढ़ता से निंदा की है और राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी की रिहाई की मांग की है।” माकपा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की धीमी प्रतिक्रिया भाजपा सरकार के वैचारिक जुड़ाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन के साथ रणनीतिक निकटता को दर्शाती है। माकपा की ओर से जारी बयान में कहा गया है, “यह अमेरिका समर्थक रुख मोदी सरकार की दक्षिणपंथी विचारधारा और ट्रंप प्रशासन के साथ रणनीतिक संबंधों के अनुरूप है। ऐसा रुख अपनाकर भारत ने ‘ग्लोबल साउथ’ के हितों का प्रतिनिधित्व करने का कोई भी दावा छोड़ दिया है।”

उल्लेखनीय है कि अमेरिकी सैनिकों ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास में अभियान चलाकर राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को हिरासत में ले लिया गया। इस कार्रवाई से लैटिन अमेरिका और उसके बाहर भी तीखी प्रतिक्रियाएं हुई हैं, कई देशों और समूहों ने अंतरराष्ट्रीय कानून और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर नतीजों की चेतावनी दी है। विदेश मंत्रालय द्वारा सप्ताहांत में जारी भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया में अमेरिका की निंदा नहीं की गई, बल्कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए संयम और बातचीत का आग्रह किया गया। इस रुख की आलोचना न केवल माकपा बल्कि अन्य विपक्षी पार्टियों ने भी की है और सवाल उठाया है कि क्या भारत अपनी पारंपरिक गुटनिरपेक्ष और संप्रभु विदेश नीति से दूर जा रहा है। माकपा ने कहा, “माकपा मांग करती है कि मोदी सरकार इस शर्मनाक रुख को छोड़े और वेनेजुएला में अमेरिकी आक्रामकता और अवैध कृत्यों के खिलाफ खुलकर सामने आये।” माकपा ने केंद्र सरकार से संप्रभुता, अहस्तक्षेप और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों को स्पष्ट रूप से बनाए रखने का आह्वान किया है।

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