संसद में दो तिहाई बहुमत को लेकर गुणा-भाग शुरू 

दिल्ली डायरी प्रवेश कुमार मिश्र। संसद के मानसून सत्र के दौरान सरकार 131 वें संविधान संशोधन यानी परिसीमन विधेयक 2026 को पारित कराने के लिए विशेष बहुमत दो-तिहाई यानी 360 सांसदों का समर्थन जुटाने के प्रयास में लगी हुई है. चर्चा है कि टीएमसी व शिवसेना उद्धव गुट से अलग हुए सांसदों को राजग खेमे में जोड़ने के बाद सरकार के रणनीतिकार अब डीएमके जैसे दलों से समर्थन प्राप्त करने की कोशिश में लगे हैं. इतना ही नहीं यह भी प्रयास किया जा रहा है कि कांग्रेस, सपा, राजद व जेएमएम के कुछ सांसद सदन के अंदर जब वोटिंग का समय आए तो वे अनुपस्थित होकर इस विधेयक को पारित कराने में परोक्ष मदद करें. जबकि कांग्रेसी रणनीतिकार विपक्षी दलों को एकजुट रखकर सरकार को जादुई आंकड़ा छूने से रोकने की रणनीति बना रहे हैं.

एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की सुगबुगाहट

पिछले दिनों एनसीपी नेता शरद पवार द्वारा किए राजनीतिक मेल मिलाप के बाद चर्चा है कि एनसीपी के दोनों धड़े एक हो सकते हैं तथा राजग खेमे का हिस्सा बन सकते हैं. दिल्ली और मुंबई के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि भाजपा ने शरद पवार गुट के सामने शर्त रखी है कि एनडीए में सीधे एंट्री के बजाय पहले उन्हें अजीत पवार गुट के साथ विलय करना होगा. चर्चा है कि राकांपा (एसपी) के जयंत पाटिल और अजीत गुट के प्रफुल्ल पटेल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से गुप्त मुलाकातें की हैं, जिससे इस चर्चा को और बल मिला. हालांकि अभी अजीत पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार इस विलय का कड़ा विरोध कर रहे हैं. उनका मानना है कि विलय से शरद पवार और सुप्रिया सुले का प्रभाव पार्टी पर फिर से बढ़ जाएगा.

भाजपा बेचैन

नीट पेपर लीक के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग व शिक्षा नीति में बदलाव को लेकर अनशन पर बैठे प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक व काकरोच जनता पार्टी के आह्वान पर मानसून सत्र के पहले दिन जिस तरह से दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों छात्रों का हुजूम उमड़ा था उसको देखकर भाजपाई रणनीतिकार परेशान बताए जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि दिल्ली पुलिस द्वारा छात्रों पर किए गए बल प्रयोग के कारण जिस तरह का संदेश निकला है उसके दूरगामी प्रभाव को भांपकर सरकार व पार्टी बेचैन है. इतना ही नहीं जिस तरह से कांग्रेस पार्टी व नेताप्रतिपक्ष राहुल गांधी ने घायल बच्चों से मुलाकात कर सरकार को घेरने का प्रयास आरंभ किया है उसके कारण भी भाजपाई रणनीतिकारों के होश उड़े हुए हैं. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस सुलगते आक्रोश से बचने के लिए सरकार की ओर से जल्द कोई ठोस फार्मूले के साथ बयान दिया जा सकता है.

कर्नाटक फार्मूला अपनाएगी कांग्रेस

पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस खेमे में राजनीतिक सरगर्मियां अचानक तेज हो गई है.वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बीच नेतृत्व को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान को शांत करना पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है.चुनाव से ठीक पहले गुटबाजी पर काबू पाने के लिए कांग्रेस ने ‘कर्नाटक मॉडल’r को अपनाने का फैसला किया है. इसके तहत पंजाब में कांग्रेस एकता बस यात्रा शुरू करने की योजना बनाई गई है, जिसमें सभी दिग्गज नेता एक साथ एक ही विशेष बस में सवार होकर पूरे पंजाब का दौरा करेंगे. इस यात्रा को हरी झंडी दिखाने के लिए राहुल गांधी को आमंत्रित किया गया है.

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