विपक्ष का ब्लैक प्रोटेस्ट: राहुल ने मोदी पर साधा निशाना, मोदी को इतिहास का सबसे युवा विरोधी प्रधानमंत्री बताया 

प्रवेश कुमार मिश्र नई दिल्ली।मौजूदा मानसून सत्र सिर्फ विधायी कामकाज की औपचारिकताओं का गवाह नहीं बन रहा, बल्कि यह सत्ता की जवाबदेही और विपक्ष के आक्रामक तेवरों के बीच एक ऐतिहासिक टकराव का अखाड़ा बन चुका है. संसद की दहलीज से लेकर सड़क तक भारतीय लोकतंत्र आज एक बार फिर अपनी पूरी जीवंतता और जटिलता में दिखाई दिया. मानसून सत्र के दौरान आज विपक्षी सांसदों का संसद के भीतर और बाहर काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन करना महज एक सांकेतिक विरोध नहीं है, बल्कि यह हाल के दिनों में उपजे गहरे राजनीतिक असंतोष का प्रकटीकरण है.

पिछले दिनों कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री आवास पर धरना, उनकी संक्षिप्त गिरफ्तारी और फिर रिहाई ने विपक्ष के हौसलों को जिस तरह धार दी थी, आज का यह देशव्यापी काला प्रदर्शन उसी की अगली कड़ी के रूप में देखा जा सकता है. काले कपड़ों में एकजुट हुआ विपक्ष यह संदेश देने में सफल रहा है कि वह युवाओं के अधिकारों की लड़ाई को ठंडे बस्ते में नहीं जाने देगा. विपक्ष इस समय बेहद आक्रामक मुद्रा में है और वह सरकार को किसी भी मोर्चे पर वाकओवर देने के मूड में नहीं है. इतना ही नहीं इस आंदोलन की धार को राहुल गांधी के तीखे और बेहद संवेदनशील बयान ने और तेज कर दिया, जिसमें उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए उन्हें भारत के इतिहास का सबसे युवा विरोधी प्रधानमंत्री करार दिया. राहुल गांधी ने विशेष संवाददाता सम्मेलन में केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं की, बल्कि कुछ बेहद चौंकाने वाले तथ्य देश के सामने रखे. उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में देश में 152 पेपर लीक हो चुके हैं, जिससे 7.5 करोड़ से अधिक छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है, लेकिन आज तक किसी भी बड़े दोषी को सजा नहीं मिली. राहुल गांधी ने विभिन्न तथ्यों को रखते हुए स्पष्ट किया कि परीक्षाओं की शुचिता का तार-तार होना देश के युवाओं के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात है इसलिए विपक्ष तब तक पीछे नहीं हटेगा जब तक कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं हो जाता और परीक्षा प्रणाली में आमूल-चूल सुधार नहीं किए जाते.

हालांकि चौतरफा घिरती और बढ़ते जन-आक्रोश से दबाव में आई सरकार के रुख में अब एक कूटनीतिक बदलाव साफ नजर आ रहा है. सरकार अब केवल सख्त रुख अपनाने के बजाय सक्रिय संवाद की रणनीति पर उतर आई है. छात्रों और वांगचुक से संपर्क साधना इसी रणनीति का हिस्सा है ताकि असंतोष के सुलगते मोर्चों को शांत किया जा सके और विपक्ष के हाथों से बड़े मुद्दे छीने जा सकें. इतना ही नहीं संसद में जारी गतिरोध को दूर करने के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू द्वारा संसद में नीट मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार होने का बयान भी यह दिखाता है कि सरकार अब विपक्ष के ब्लैक प्रोटेस्ट से बैकफुट पर है.

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