सीहोर। समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी में गंभीर अनियमितताओं के मामले में कलेक्टर बालागुरु के. ने मप्र वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन को पत्र लिखकर बद्रीनाथ वेयर हाउस (वनखेड़ा-चरनाल) को तीन रबी विपणन वर्षों और गौर वेयर हाउस को एक रबी विपणन वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट करने की अनुशंसा की है. जांच में बिना स्लॉट बुकिंग किसानों से खरीदा गया हजारों बोरी गेहूं अवैध रूप से बद्रीनाथ वेयर हाउस में भंडारित मिला था।
गौरतलब है कि गौर वेयर हाउस व बद्रीनाथ वेयर हाउस एक दूसरे के समीप स्थित हैं .दोनों का संचालक भी एक ही है. पूर्व में अनियमितताओं के कारण बद्रीनाथ वेयर हाउस को इस वर्ष उपार्जन केंद्र नहीं बनाया गया था, लेकिन उसके पास स्थित गौर वेयर हाउस को खरीदी केंद्र की जिम्मेदारी दी गई थी. जांच में सामने आया कि संचालक ने बिना स्लॉट बुकिंग कई किसानों से गेहूं खरीदकर उसे बद्रीनाथ वेयर हाउस में भंडारित कर दिया.
शिकायत प्रशासन तक पहुंचने के बाद रातोंरात बद्रीनाथ वेयर हाउस से गेहूं दूसरी जगह शिफ्ट करने का प्रयास किया गया. इसी दौरान वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन की टीम ने निरीक्षण किया तो उपार्जन केंद्र नहीं होने के बावजूद बद्रीनाथ वेयर हाउस में 5,630 बोरी समर्थन मूल्य का गेहूं मिला. दोनों वेयर हाउस के भौतिक सत्यापन के बाद यह गेहूं तकीपुर स्थित सरकारी वेयर हाउस में स्थानांतरित कराया गया.
प्रशासन का मानना है कि इन अनियमितताओं से उपार्जन व्यवस्था प्रभावित हुई और किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा. प्रशासन ने इसे गंभीर अनियमितता माना और इसी आधार पर दोनों वेयर हाउस को ब्लैकलिस्ट करने की अनुशंसा की गई है. जांच में सामने आया कि जिन किसानों ने शिकायत की थी, उनके स्लॉट खरीदी केंद्र स्थानांतरित होने के बाद के थे, जबकि उनसे गेहूं पहले ही खरीद लिया गया था. इन किसानों में 722 क्विंटल, 465 क्विंटल और 430 क्विंटल सहित बड़ी मात्रा में गेहूं बेचने वाले किसान शामिल थे. बद्रीनाथ वेयर हाउस में मिली 5,630 बोरियां इन्हीं किसानों के गेहूं की थीं, जिन्हें नियमों के विपरीत पहले ही खरीदा और भंडारित कर दिया गया था.
स्लॉट से पहले खरीद लिया था किसानों से गेहूं
मामले के दौरान कुछ किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे और शिकायत की कि उपार्जन केंद्र बदल जाने से उनके गेहूं के बिल नहीं बन पा रहे हैं. किसानों का कहना था कि गौर वेयर हाउस से खरीदी केंद्र न्यू बालाजी वेयर हाउस, पीपलखेड़ा स्थानांतरित होने के कारण भुगतान अटक गया है.मामला सामने आने के बाद 12 जून को बद्रीनाथ और गौर वेयर हाउस के संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था. संचालक द्वारा प्रस्तुत जवाब को प्रशासन ने असंतोषजनक माना. प्रशासन ने इसे उपार्जन कार्य के प्रति लापरवाही, स्वेच्छाचारिता तथा शासन एवं वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना माना था.
