नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 के कार्यान्वयन के तहत अगले 10 वर्षों में 50 करोड़ लोगों को सहकारी समितियों के दायरे में लाने और भारतीय अर्थव्यवस्था में सहकारिता क्षेत्र के योगदान को तीन गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह जानकारी सहकारिता मंत्रालय ने संसद में दी।
नीति में 6 रणनीतिक स्तंभ, 16 उद्देश्य और 83 सिफारिशें शामिल हैं, जिनके माध्यम से सहकारी क्षेत्र के समग्र विकास का रोडमैप तैयार किया गया है। हालांकि, इस नीति के लिए अलग से किसी बजटीय प्रावधान का प्रावधान नहीं किया गया है।
सरकार ने बताया कि नीति में महिलाओं, दलितों, आदिवासियों, युवाओं, छोटे एवं सीमांत किसानों और अन्य कमजोर वर्गों की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत श्वेत क्रांति 2.0 के माध्यम से डेयरी सहकारी समितियों का विस्तार, रोजगार सृजन और महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सरकार के अनुसार, श्वेत क्रांति 2.0 के तहत अगले पांच वर्षों में डेयरी सहकारी समितियों द्वारा दुग्ध संग्रहण को 660 लाख किलोग्राम प्रतिदिन से बढ़ाकर 1007 लाख किलोग्राम प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 25,282 नई डेयरी सहकारी समितियां पंजीकृत की जा चुकी हैं।
इसके अलावा, सरकार ने देश की सभी पंचायतों, विशेषकर जनजातीय और दलित क्षेत्रों, में नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS), डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों की स्थापना की योजना लागू की है। 15 जून 2026 तक देशभर में 38,138 नई सहकारी समितियां पंजीकृत की जा चुकी हैं, जबकि 21,292 डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों को सशक्त बनाया गया है।
