
विजय शर्मा भोपाल। करीब चार वर्ष के इंतजार के बाद भोपाल नगर निगम में 12 एल्डरमैन (मनोनीत पार्षद) नियुक्त कर दिए गए हैं. हालांकि, इन नियुक्तियों में एक भी महिला को शामिल नहीं किए जाने पर सवाल उठने लगे हैं. भाजपा जहां महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और नेतृत्व को बढ़ावा देने की बात करती रही है, वहीं नगर निगम की इस सूची में महिलाओं की पूरी तरह अनुपस्थिति चर्चा का विषय बन गई है.
बताया जा रहा है कि एल्डरमैन के नाम भाजपा जिला कार्यालय से भेजे गए थे. पार्टी का शीर्ष नेतृत्व लगातार महिलाओं को विभिन्न क्षेत्रों में अवसर देने और उनकी भागीदारी बढ़ाने की बात करता रहा है.
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सांसद, विधायक और महापौर के चुनाव में पार्टी सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन के साथ महिलाओं की भागीदारी का भी ध्यान रखती है, लेकिन एल्डरमैन चयन में ऐसा नहीं दिखा. विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर भाजपा को घेर सकता है.
इस संबंध में सांसद आलोक शर्मा से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि एल्डरमैन की सूची में महिलाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए था. वहीं महापौर मालती राय, महिला जिला अध्यक्ष प्रियंका मिश्रा, विधायक रामेश्वर शर्मा, मंत्री कृष्णा गौर और विधायक भगवानदास सबनानी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष नहीं मिल सका.
12 एल्डरमैन की सूची:
श्याम विजयवर्गीय, महेश तिवारी, सुनील द्विवेदी, प्रदीप तोषी, लीलाधर यादव, प्रमोद पोलवटकर, राजेश साहू, रवि गोयल, दीपक सक्सेना, विनोद चौरसिया, डी.के. सक्सेना और विजय सिंह को एल्डरमैन बनाया गया है. राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि इनमें अधिकांश किसी न किसी सांसद या विधायक के करीबी हैं.
क्या कहते हैं भाजपा जिला अध्यक्ष
भाजपा जिला अध्यक्ष एवं एमआईसी सदस्य रविन्द्र यति ने कहा, एल्डरमैन की नियुक्ति में महिला आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए महिलाओं के नाम शामिल नहीं किए गए. नगर निगम के निर्वाचित पार्षदों में पहले से ही 50 प्रतिशत महिलाएं हैं.
