रातभर मूसलाधार बारिश से बढ़ीं मुश्किलें

सिंगरौली। जिले में सोमवार की देर रात हुई मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर नगर निगम की तैयारियों की पोल खोल दी। चितरंगी तहसील के सोन नदी तीर क्षेत्र में तेज बारिश के कारण कई स्थानीय नदी-नाले उफान पर आ गए, जबकि अनेक खेतों में पानी भर गया। राहत की बात यह रही कि समाचार लिखे जाने तक कहीं से भी जनहानि अथवा बड़े आर्थिक नुकसान की सूचना नहीं मिली थी।

जिला मुख्यालय बैढ़न का अंतरराज्यीय बस स्टैंड वर्षों पुरानी जलभराव की समस्या से फिर जूझता नजर आया। म.प्र., उ.प्र., छत्तीसगढ़ और बिहार को जोड़ने वाले इस प्रमुख बस स्टैंड के मुख्य प्रवेश द्वार पर बारिश के बाद पानी भर जाने से यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बसों के साथ दोपहिया और चारपहिया वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित रही। कीचड़ और गड्ढों के कारण फिसलने तथा दुर्घटना की आशंका बनी रही। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बस स्टैंड में जलभराव की समस्या नई नहीं है। पिछले करीब दस वर्षों से हर बारिश में यही हालात बनते हैं, लेकिन ननि व संबंधित विभाग अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं कर पाए हैं।

स्टैंड की बदहाली यात्रियों की परेशानी

स्थानीय लोगों ने यह भी स्वीकार किया कि नगर निगम के सफाईकर्मी नियमित सफाई अभियान चलाते हैं, लेकिन केवल सफाई से समस्या का समाधान संभव नहीं है। जब तक मजबूत और वैज्ञानिक जल निकासी व्यवस्था विकसित नहीं होगी, तब तक हर बारिश में यही स्थिति बनी रहेगी। नागरिकों, व्यापारियों और यात्रियों ने महापौर, ननि अध्यक्ष, संबंधित वार्ड पार्षद और ननि आयुक्त से मांग की है कि बस स्टैंड परिसर की समुचित ड्रेनेज व्यवस्था विकसित कर गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराया जाए। उनका कहना है कि अंतरराज्यीय बस स्टैंड जिले का प्रवेश द्वार है, इसलिए इसकी बदहाल स्थिति न केवल यात्रियों की परेशानी बढ़ा रही है, बल्कि शहर की छवि भी धूमिल कर रही है। अब लोगों को उम्मीद है कि इस बार प्रशासन वर्षों पुरानी जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करने की दिशा में ठोस कदम उठाएगा।

तेज बारिश ने नाली के क्षमता पर उठाया सवाल

व्यापारियों के अनुसार मस्जिद तिराहा, तुलसी मार्ग और काली मंदिर क्षेत्र का वर्षा जल बस स्टैंड परिसर से होकर चौपाटी की ओर निकलता है। हाल ही में बनाई गई नाली से लोगों को बड़ी उम्मीद थी, लेकिन पहली ही तेज बारिश में उसकी क्षमता पर सवाल खड़े हो गए। उनका आरोप है कि नाली का निर्माण तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं हुआ, जिससे पानी की निकासी बाधित हो रही है। व्यापारियों ने बताया कि दुर्गा मंदिर के सामने अतिक्रमण हटाने के बाद पूर्व ननि आयुक्त डीके शर्मा ने यहां फल मंडी विकसित करने की योजना बनाई थी, लेकिन जलभराव और कीचड़ के कारण आज भी अधिकांश फल विके्रता सड़क किनारे ठेले लगाने को मजबूर हैं। इससे सड़क संकरी हो जाती है और यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है।

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