अमेरिका-ईरान तनाव के बीच तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंची

वाशिंगटन, 20 जुलाई (वार्ता) अमेरिकी सेना के तीन जवानों की रविवार को मौत और अमेरिका एवं ईरान के बीच तनाव और बढ़ने के बाद तेल की कीमतें बढ़कर 90 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं।

इस बढ़ोतरी से ईंधन की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका है क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण वाहन चालकों के लिए पेट्रोल एवं माल ढुलाई के लिए डीजल महंगा हो सकता है जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई की चिंताएं भी बढ़ सकती हैं।

कच्चा तेल, जो अंतरराष्ट्रीय मानक है, जून के मध्य के बाद पहली बार 90 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया। पिछले सप्ताह अमेरिका-ईरान युद्धविराम के टूटने के बाद हुई इसने मूल्य में और इजाफा किया है जिसके परिणामस्वरूप युद्धविराम के दौरान थोड़े समय के लिए सामान्य हुई होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर टैंकरों की आवाजाही फिर से बाधित हो गई।

कीमतों में यह हालिया उछाल सप्ताहांत में मिले उन नए संकेतों के बाद आया है जिनसे पता चलता है कि अमेरिका-ईरान समझौता एवं युद्धविराम वास्तव में खत्म हो चुके हैं और दोनों पक्ष अपने सैन्य अभियान बढ़ा रहे हैं। अमेरिकी ऑटोमोबाइल एसोसिएशन के अनुसार, रविवार को देश भर में पेट्रोल की औसत कीमत राजनीतिक रूप से अहम चार डॉलर प्रति गैलन के निशान से ठीक नीचे थी और सोमवार को इसके और बढ़ने की उम्मीद है।

हाल की घटनाओं में कुवैत में तेल और बिजली अवसंरचना को निशाना बनाकर किए गए ईरानी हमलों की रिपोर्टें शामिल हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने शनिवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर अमेरिका-ईरान समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि अगर दुश्मनी जारी रही तो तेहरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगी इसका कड़ा जवाब देंगे।

श्री ट्रंप ने इन बातों को खारिज कर दिया और कहा कि उन्हें ईरानी नेता की टिप्पणियों से कोई फर्क नहीं पड़ता। कीमतों में हालिया उछाल के बावजूद, जानकारों का मानना है कि युद्ध के दौरान तेल बाज़ार उम्मीद से ज़्यादा मज़बूत बने हुए हैं। इसका कारण चीन की ओर से मांग में कमी, सरकारी आपातकालीन रिज़र्व, जिसमें अमेरिका का रणनितिक पेट्रोलियम रिज़र्व भी शामिल है, से तेल जारी करने का तालमेल भरा फ़ैसला और वाणिज्यिक स्टॉक की अच्छी स्थिति शामिल है। उन्होंने चेतावनी दी कि आपूर्ति में और रुकावटों के खिलाफ़ बाज़ार को बचाने में ये कारक कम असरदार होते जा रहे हैं।

इसके अलावा, रूसी रिफाइनरियों पर यूक्रेनी ड्रोन हमलों के असर से परिष्कृत ईंधन बाज़ार में दबाव बढ़ रहा है जिसके कारण रूस ने डीज़ल के निर्यात पर रोक लगा दी है और वैश्विक ईंधन निर्यात को सीमित कर दिया है।

 

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