
डिंडौरी। देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में सोमवार को जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) के बैनर तले प्रदेश अध्यक्ष इन्द्रपाल मरकाम के नेतृत्व में महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सात सूत्रीय मांगपत्र प्रस्तुत करते हुए आवश्यक संवैधानिक एवं प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की गई।
ज्ञापन में कहा गया कि देशभर के लाखों छात्र-छात्राएं शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही की मांग को लेकर लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। जंतर-मंतर पर चल रहा छात्र आंदोलन इसी जनभावना का प्रतीक है। विद्यार्थियों का भविष्य राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है, इसलिए उनकी न्यायोचित मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि हाल के वर्षों में नीट , यूजीसी – नेट सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं, पेपर लीक, परीक्षा प्रबंधन की कमियों तथा भर्ती प्रक्रियाओं में हो रही देरी ने लाखों युवाओं का भरोसा कमजोर किया है। संगठन ने यह भी कहा कि वर्ष 2026 में कथित नीट, यू जी पेपर लीक से आहत होकर कुछ विद्यार्थियों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाएं अत्यंत चिंताजनक हैं और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।
ज्ञापन में मांग की गई है कि देश की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं एवं भर्ती प्रक्रियाओं को पूर्णतः पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाया जाए। परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए स्वतंत्र उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित की जाए तथा पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं की समयबद्ध एवं निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही छात्र प्रतिनिधियों से संवाद स्थापित कर जंतर-मंतर पर आंदोलनरत छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया गया।
संगठन ने आंदोलनकारियों द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर संविधान एवं कानून के अनुरूप उचित स्तर पर विचार करने, पूरे देश में समान शिक्षा एवं समान पाठ्यक्रम लागू करने, डिंडोरी जैसे दूरस्थ एवं आदिवासी जिलों में सभी ऑनलाइन एवं ऑफलाइन प्रतियोगी परीक्षाओं के परीक्षा केंद्र स्थापित करने तथा नीट -यू जी परीक्षा को ऑनलाइन किए जाने से पूर्व सभी शासकीय हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण कंप्यूटर शिक्षा की व्यवस्था लागू कर कम से कम पांच वर्ष बाद ही ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली लागू करने की मांग भी रखी।
इसके अलावा ज्ञापन में कथित नीट -यू जी पेपर लीक से प्रभावित होकर आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग भी की गई।
जयस के प्रदेश अध्यक्ष इन्द्रपाल मरकाम ने कहा कि संगठन का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध करना नहीं, बल्कि देश के करोड़ों विद्यार्थियों के भविष्य की रक्षा करना और शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष, गुणवत्तापूर्ण एवं विश्वसनीय बनाना है। उन्होंने राष्ट्रपति से ज्ञापन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर संबंधित प्राधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने का आग्रह किया।
