सेंट्रल जीएसटी का तत्कालीन अधीक्षक निकाला धनकुबेर, सीबीआई ने दर्ज की एफआईआर

जबलपुर: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, भ्रष्टाचार निरोधक शाखा जबलपुर ने सेंट्रल जीएसटी डिवीजन-1 के तत्कालीन अधीक्षक मुकेश कुमार बर्मन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का प्रकरण दर्ज कर लिया है। रिश्वतखोरी प्रकरण की विस्तृत जांच में आरोपी धनकुबेर निकला। आरोपी अधिकारी ने बीते कुछ वर्षों में अपने और अपने परिजनों के नाम पर भारी बेनामी संपत्तियां खड़ी की हैं।

विदित हो कि सीबीआई जबलपुर ने 16 दिसंबर 2025 को सीजीएसटी कार्यालय के इंस्पेक्टर सचिन खरे और अधीक्षक मुकेश कुमार बर्मन सहित अन्य अज्ञात लोक सेवकों के खिलाफ शिकायतकर्ता से रिश्वत मांगने के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी। यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत दज्र किया गया था। ट्रैप की कार्रवाई के तुरंत बाद 17 दिसंबर 2025 को आरोपी अधीक्षक मुकेश कुमार बर्मन के आवासीय परिसरों पर छापेमारी की गई थी। तलाशी के दौरान अचल संपत्तियों के दस्तावेज, विलासिता से जुड़े खर्चों के बिल, वेतन विवरण और बैंक खातों की पासबुक जब्त की गईं। रिश्वतखोरी के मामले की विस्तृत स्क्रूटनी के बाद जांच में सामने आया है कि आरोपी अधिकारी ने बीते कुछ वर्षों में अपने और अपने परिजनों के नाम पर भारी बेनामी संपत्तियां खड़ी की हैं। जांच एजेंसी ने आरोपी अधिकारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आपराधिक मामला दर्ज किया है।
6 साल की काली कमाई
बैंकों और दफ्तरों से मिले दस्तावेजों की गहन जांच में यह बात सामने आई है कि बर्मन ने 01 जनवरी 2019 से 17 दिसंबर 2025 के बीच अपने पद का दुरुपयोग कर अपने और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की है। सीबीआई ने आरोपी अधीक्षक की इस काली कमाई का पूरा लेखा-जोखा तैयार किया है। सीबीआई अब इस मामले में यह पता लगाने में जुटी है कि इस भ्रष्टाचार के नेटवर्क में सीजीएसटी कार्यालय के और कौन-से बड़े अधिकारी या कर्मचारी शामिल थे।
89 प्रतिशत से अधिक मिली बेनामी संपत्ति
सूत्रों के मुताबिक सीबीआई द्वारा की जांच में यह बात सामने आई कि मुकेश कुमार बर्मन के 1 जनवरी 2019 से लेकर 17 दिसम्बर 2025 तक के सेवा कार्यकाल के दौरान जुटाए गए गोपनीय और वित्तीय दस्तावेजों की बारीकी से स्क्रूटनी की गई। जांच में यह बात सामने आई कि इस अवधि के दौरान अधिकारी ने अपने वैध आय के ज्ञात स्रोतों से इतर कुल 92, 33,324 रुपये की अनुपातहीन संपत्ति का साम्राज्य खड़ा किया। यह बेनामी संपत्ति उनके कुल कानूनी आय स्रोतों के मुकाबले 89.36 प्रतिशत अधिक पाई गई है, जिसका अधिकारी के पास कोई संतोषजनक हिसाब नहीं था।

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