10 दिन से बारिश लापता, उमस ने किया बेहाल

सीहोर। जिले में पिछले दस दिनों से अच्छी बारिश नहीं होने के कारण खेती-किसानी पर संकट गहराने लगा है. दिनभर उमस और बादलों की आवाजाही के बावजूद बारिश नहीं होने से सोयाबीन की फसल पीली पडऩे लगी है, जबकि रात का तापमान भी सामान्य से अधिक बना हुआ है. मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे में हल्की बारिश की संभावना जताई है, लेकिन जिले को अभी भी जोरदार बारिश का इंतजार है.

जिले में मानसून की रफ्तार अचानक थमने से किसानों की चिंता बढ़ गई है. पिछले दस दिनों से जिले में कहीं भी उल्लेखनीय बारिश नहीं हुई है. शनिवार को दिनभर घने बादल छाए रहे और उमस ने लोगों को बेहाल किया, लेकिन बारिश केवल चंद बूंदों तक सीमित रही. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम दिशा से चल रही तेज हवाओं के कारण वर्षा वाले बादल जिले में टिक नहीं पा रहे हैं, जिससे तेज बारिश की स्थिति नहीं बन रही है.

आरएके कॉलेज स्थित मौसम वेधशाला के विशेषज्ञ डॉ. सत्येंद्र सिंह तोमर के अनुसार अगले पांच दिनों तक आसमान में बादल छाए रहने की संभावना है, लेकिन बादलों का घनत्व कम रहेगा. अल नीनो प्रभाव के चलते पश्चिमी हवाएं सक्रिय हैं, जिससे वर्षा करने वाले बादल आगे बढ़ जा रहे हैं. मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे में रिमझिम बारिश की संभावना जताई है, जो फसलों के लिए राहत तो दे सकती है, लेकिन जलस्त्रोतों की स्थिति सुधारने के लिए पर्याप्त नहीं होगी.

बारिश नहीं होने से मौसम भी लगातार गर्म बना हुआ है. शनिवार को अधिकतम तापमान 34.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 27 डिग्री रहा, जो सामान्य से करीब तीन डिग्री अधिक है. दिन और रात के तापमान में मात्र सात डिग्री का अंतर होने से रात में भी उमस और गर्मी लोगों को परेशान कर रही है. ऐसे में सभी को मूसलाधार बारिश का बेसब्री से इंतजार है.

खेतों में पौधों की पत्तियां पीली पडऩे लगीं

बारिश की कमी का सबसे अधिक असर सोयाबीन की फसल पर दिखाई देने लगा है. खेतों में पौधों की पत्तियां पीली पड़ रही हैं और कई स्थानों पर पौधे मुरझाने लगे हैं. जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वे स्प्रिंकलर के माध्यम से फसलों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं. हालांकि अधिकांश किसानों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो सिंचाई के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं रहेगा और फसल को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

इंद्रदेव को मनाने खेतों में गूंजे भजन-कीर्तन

चंदेरी. लगातार बारिश नहीं होने से खेतों में खड़ी फसलें सूखने लगी थीं और जलस्रोत भी सूखने की कगार पर पहुंच गए थे. इस संकट के बीच ग्राम रलावती, चंदेरी एवं आसपास के किसानों ने खेतों में सामूहिक पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का आयोजन कर इंद्रदेव से अच्छी वर्षा की प्रार्थना की. किसानों ने ढोलक, हारमोनियम (पेटी) और अगरबत्ती के साथ खेतों में भजन-कीर्तन करते हुए इंद्रदेव का आह्वान किया. उन्होंने समय पर अच्छी बारिश, फसलों की सुरक्षा और क्षेत्र में खुशहाली की कामना की. किसानों का कहना था कि यदि शीघ्र वर्षा नहीं हुई तो खरीफ की फसल को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. पूजा-अर्चना के दौरान क्षेत्र में हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई, जिससे किसानों के चेहरों पर खुशी लौट आई. ग्रामीणों ने इसे शुभ संकेत मानते हुए उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में अच्छी वर्षा होगी और खेतों में फिर से हरियाली लौटेगी. किसानों ने प्रकृति के संरक्षण और जल स्रोतों के संवर्धन का भी संकल्प लिया.

जिले में अब तक 354.9 एमएम बारिश दर्ज

भू-अभिलेख शाखा के आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक औसतन 354.9 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक 449.9 मिमी बारिश हो चुकी थी. इस प्रकार इस वर्ष औसत वर्षा पिछले साल की तुलना में लगभग चार इंच कम है. हालांकि आष्टा और जावर ब्लॉक में पिछले वर्ष की अपेक्षा अधिक वर्षा हुई है, लेकिन श्यामपुर, भैरूंदा, बुदनी, रेहटी और सीहोर सहित अधिकांश क्षेत्रों में वर्षा का आंकड़ा पिछड़ गया है. ऐसे में अब सबको झमाझम बारिश का इंतजार है.

 

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