हाईकोर्ट ने छह साल पुराने मामले में आरोपी को किया दोषमुक्त

जबलपुर। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राजेन्द्र कुमार वानी की एकलपीठ ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया है कि दो बालिगों के बीच आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंधों के बाद यदि किसी कारणवश शादी नहीं हो पाती या आरोपित शादी से इनकार कर देता है, तो महज इसी आधार पर उसे दुष्कर्म या आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि दुष्कर्म का अपराध तभी बनेगा, जब यह साबित हो कि आरोपी की शुरुआत से ही शादी का झूठा वादा कर शारीरिक शोषण करने की मंशा थी।

हाईकोर्ट ने यह आदेश सुनाते हुए सीधी निवासी आरोपी रोहित कोल को दुष्कर्म और आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में दोषमुक्त कर दिया व अधीनस्थ अदालत द्वारा सुनाई गई 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा निरस्त कर दी। दरअसल अभियोजन के अनुसार 10 फरवरी 2020 को सीधी जिले की युवती घर से चारा और सब्जी लेने निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। 12 फरवरी को उसका शव मझौली थाना क्षेत्र में अरहर के खेत में पेड़ से लटका मिला। जांच और डीएनए रिपोर्ट में सामने आया कि युवती तीन माह की गर्भवती थी तथा गर्भस्थ शिशु का जैविक पिता आरोपी था। आरोप था कि आरोपी ने शादी का वादा कर संबंध बनाए और बाद में शादी से इनकार कर दिया, जिससे आहत होकर युवती ने आत्महत्या कर ली।

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