वांगचुक को जंतर मंतर से हटाने पर विपक्षी दलों ने केंद्र पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का लगाया आरोप

नयी दिल्ली, 18 जुलाई (वार्ता) कांग्रेस समेत प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं ने पिछले 20 दिनों से अनशन कर रहे शिक्षाविद एवं अधिकार कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार को जंतर मंतर से हटाये जाने पर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा और इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन की प्रवृत्ति का सूचक बताया।

इस बीच केंद्र में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने वांगचुक के स्वास्थ्य के मुद्दे पर विपक्षी दलों की यह कहते हुए तीखी आलोचना की कि क्या विपक्ष सिर्फ राजनीतिक तमाशा बनाए रखने के लिए उनकी हालत और खराब करना पसंद करता है?

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुई घटना लोकतंत्र और संविधान पर एक और काला धब्बा है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों, महिला पहलवानों, दलित-आदिवासियों और पेपर लीक से प्रभावित छात्रों सहित विभिन्न वर्गों की आवाज़ को सरकार लगातार अनसुना करती रही है। उन्होंने जोर दिया कि लोकतांत्रिक विरोध को दबाने की यह प्रवृत्ति चिंताजनक है।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल में भर्ती करवाने के सरकार के फैसले की निंदा करते कहा कि ‘असत्य और हिंसा’ पर आधारित सरकार हर मामले में गलत निर्णय लेती है। उन्होंने कहा कि श्री वांगचुक जनहित के मुद्दों पर शांतिपूर्ण आमरण अनशन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उन्हें जंतर-मंतर से हटाकर गलत कदम उठाया है। प्रश्नपत्र लीक, शिक्षा की बढ़ती लागत और छात्रों की आत्महत्याएं देश के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दे हैं, जिन्हें बल प्रयोग से दबाया नहीं जा सकता। ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के माध्यम से छात्र अपनी आवाज उठाते रहेंगे और कोई भी ताकत उन्हें रोक नहीं सकती।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, “सोनम वांगचुक जी को ‘बल-प्रयोग’ करके, ज़बरदस्ती उनके आमरण अनशन स्थल से उठाकर ले जाना अत्यंत निंदनीय खबर है। आज सुबह की ये घटना थोड़ी ही देर में पूरे देश और संपूर्ण विश्व में फैल चुकी है। सारी दुनिया और देशभर में सोनम वांगचुक जी को लेकर गहरी चिंता है और भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ आक्रोश भी। जो लोग सादी वर्दी में इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए धोखे से अचानक घुसे थे, उनकी पहचान सार्वजनिक की जाये।”

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च से घबरा गयी और इसी कारण पुलिस के जरिए वांगचुक को जबरन अस्पताल भेजा गया। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज भी किया ताकि आंदोलन को दबाया जा सके। उन्होंने कहा कि वांगचुक करोड़ों युवाओं की आवाज उठा रहे थे, लेकिन 20 दिनों तक सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे बातचीत करने नहीं पहुंचा।

उद्योगपति रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि वांगचुक की बिगड़ती तबीयत के बीच उन्हें आंदोलन स्थल से हटाकर अस्पताल ले जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। लोकतंत्र में जनता की आवाज़ को दबाया नहीं जाता, बल्कि संवाद और संवेदनशीलता के साथ सुना जाता है। उन्होंने सरकार से श्री वांगचुक की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और सम्मानजनक तथा शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की।

विपक्षी नेताओं के आरोपों के बीच भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, “श्री वांगचुक की शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट अब पब्लिक डोमेन में है जिसमें लिखा है कि चिकित्सा जांच उनकी अपनी सहमति से की गयी थी तो आखिर गुस्सा किस बात का है? दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद अधिकारियों ने उपवास के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद ठीक होने में मदद के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा “क्या विपक्ष सिर्फ राजनीतिक तमाशा बनाए रखने के लिए उनकी हालत और खराब करना पसंद करता? ऐसी स्थिति में समय पर मेडिकल केयर पक्का करना ज़िम्मेदारी भरा कदम है, न कि मनगढ़ंत विवाद का विषय।”

उल्लेखनीय है कि वांगचुक को आज सुबह दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर से वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (वीएमएमसी) एवं सफदरजंग अस्पताल लेकर गयी। डॉक्टरों ने बताया कि 20 दिनों के उपवास के कारण उनके शरीर में निर्जलीकरण और पोटैशियम की कमी के लक्षण पाये गये हैं। उन्होंने नसों से दवा लेने (आईवी फ्लूइड), ओआरएस तथा अन्य दवाएं लेने से इनकार कर दिया है। चिकित्सकों के अनुसार उनकी हालत स्थिर है और उन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

 

 

Next Post

शिक्षक भर्ती दस्तावेज सत्यापन 19 से 21 तक 

Sat Jul 18 , 2026
सिंगरौली। जिला शिक्षा अधिकारी सिंगरौली द्वारा प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 के चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन के लिए 10 सदस्यीय जिला स्तरीय समिति गठित की गई है। यह आदेश 17 जुलाई को जारी किया गया है। लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल एवं कर्मचारी चयन मंडल, म.प्र. द्वारा जारी निर्देशों के […]

You May Like