ज़मीन के रिकॉर्ड और डिजिटल लोन को जोड़ने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय और आरबीआई के बीच बैठक संपन्न

ज़मीन के रिकॉर्ड और डिजिटल लोन को जोड़ने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय और आरबीआई के बीच बैठक संपन्न

नयी दिल्ली, 18 जुलाई (वार्ता) ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत आने वाले भूमि संसाधन विभाग ने हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के साथ एक अहम बैठक की। इस बैठक का मकसद ज़मीन के रिकॉर्ड और डिजिटल तरीके से लिए जाने वाले कर्ज की व्यवस्था को आपस में जोड़ने के तौर-तरीकों पर चर्चा करना था, ताकि दोनों को मिलाकर आम आदमी के लिए परेशानियां कम की जा सकें।

यहां जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गयी। इसमें बताया गया कि भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेंद्र भूषण की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में आरबीआई इनोवेशन हब के मुख्य कार्यकारी अधिकारी साहिल किनी, और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस बातचीत का सबसे बड़ा मकसद यह था कि ज़मीन के रिकार्ड और बैंक के लोन देने वाली प्रणाली में तालमेल कैसे बैठाया जाए। इससे किसानों और गांवों में रहने वाले लोगों को बिना किसी परेशानी के, सुरक्षित तरीके से और उनकी मर्जी से आसानी से लोन मिल सकेगा।

बैठक में शामिल अधिकारियों ने इस बात पर चर्चा की कि अगर ज़मीन के कागजात पूरी तरह असली और डिजिटल रूप से बैंकों से जुड़े होंगे, तो सरकारी बैंकों से लोन लेना कितना आसान हो जाएगा। इससे लोन देने के काम में पूरी सफाई आएगी और काम भी तेजी से होगा। इसके अलावा ज़मीन के पक्के डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित और आसान तरीके से बैंकों तक पहुंचाने, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और खेती-किसानी से जुड़े दूसरे लोन को डिजिटल तरीके से जल्दी दिलवाना, कर्ज लेने में आने वाले खर्च को कम करना और कागजी कार्रवाई में लगने वाले समय को बचाना और धोखेबाज़ी को रोकना, ताकि कोई भी व्यक्ति एक ही ज़मीन के टुकड़े पर अलग-अलग बैंकों से कई बार कर्ज न ले सके, जैसे मामलों पर भी चर्चा की गयी।

बैठक में यह भी चर्चा की गयी कि ज़मीन को एक भरोसेमंद डिजिटल संपत्ति बनाना होगा ताकि उसके दम पर गरीब से गरीब व्यक्ति को भी बैंक से आसानी से कर्ज़ मिल सके। इसके लिए सभी विभाग डेटा का एक जैसा पैमाना अपनाएं, कंप्यूटर सिस्टम को आपस में जोड़ें, ज़मीन की पहचान संख्या के इस्तेमाल को बढ़ावा दें और ज़मीन विभाग व बैंकों के बीच तालमेल को और मजबूत करें। विभाग ने भरोसा दिलाया कि वे आरबीआई नवाचार हब और बाकी विभागों के साथ मिलकर एक ऐसा सुरक्षित और जनता के काम आने वाला डिजिटल सिस्टम तैयार करेंगे, जिससे देश के गांवों में लोन मिलने में आसानी हो और ज़मीन से जुड़े सारे काम भी बेहतर ढंग से हो सकें।

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