जबलपुर: भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा के जबलपुर ग्रामीण संगठन में उस वक्त बड़ा सियासी भूचाल आ गया, जब नवगठित कार्यकारिणी को गठन के महज 48 घंटे के भीतर ही भंग कर दिया गया। पूरी टीम को भंग किए जाने से जिले के सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक इस फैसले के पीछे की बड़ी वजह संगठन में कुछ कांग्रेसी पृष्ठभूमि के नेताओं की एंट्री और कुछ चेहरे गलत गतिविधियों में संलिप्त होना बताया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, 15 जुलाई 2026 को भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा के जबलपुर ग्रामीण संगठन में नई कार्यकारिणी की सूची जारी हुई, तभी से संगठन के भीतर असंतोष के सुर उभरने लगे थे। कुछ ऐसे चेहरों को जगह दे दी गई थी जिन पर स्थानीय स्तर पर गंभीर आपत्तियां थीं। विवाद बढ़ता देख मोर्चा के जिला अध्यक्ष एडवोकेट संजीत अहिरवार ने नवगठित जिला जबलपुर ग्रामीण अनुसूचित जाति मोर्चा की कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विवादित नामों पर समय रहते कड़ा कदम उठाकर जिला नेतृत्व ने संगठन के भीतर किसी भी तरह के बड़े डैमेज को रोकने की कोशिश की है।
प्रदेश अध्यक्ष को भेजा पत्र, अब प्रदेश नेतृत्व में होगा नई टीम का गठन
दो दिनों के भीतर ही जिला कार्यकारिणी के भंग होने से भाजपा गलियारों में हडक़ंप मच गया है। हालांकि, जिला अध्यक्ष ने साफ किया है कि वे संगठन के वरिष्ठ नेताओं और प्रदेश नेतृत्व के साथ बैठकर दोबारा मंथन करेंगे। भविष्य में प्रदेश अध्यक्ष भगवान सिंह परमार से उचित मार्गदर्शन प्राप्त करने के बाद ही सक्रिय कार्यकर्ताओं को शामिल कर नई और मजबूत समिति का पुनर्गठन किया जाएगा। जिला अध्यक्ष एडवोकेट संजीत अहिरवार ने मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भगवान सिंह परमार भोपाल को आधिकारिक पत्र लिखकर इसकी लिखित सूचना दी है। जिला अध्यक्ष ने पत्र में साफ तौर पर स्वीकार किया कि समिति में कतिपय विवादास्पद नाम शामिल हो गए थे, जिसके चलते 17 जुलाई को इस पूरी कार्यकारिणी को निरस्त किया जा रहा है।
कांग्रेसियों को जगह मिलने से भडक़ा था आक्रोश
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 15 जुलाई 2026 को जब इस नई कार्यकारिणी की सूची सार्वजनिक हुई, तो भाजपा के समर्पित और जमीनी कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष फैल गया। समिति में कुछ ऐसे लोगों को महत्वपूर्ण पदों पर बैठा दिया गया था, जो न सिर्फ मूल रूप से कांग्रेसी विचारधारा के हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर कई तरह की गलत व संदिग्ध गतिविधियों में भी शामिल रहे हैं। पार्टी के भीतर ही इसका पुरजोर विरोध शुरू हो गया था। मामले की गंभीरता और कार्यकर्ताओं के आक्रोश को देखते हुए जिला अध्यक्ष संजीत अहिरवार ने बिना देर किए डैमेज कंट्रोल किया। जिला अध्यक्ष ने साफ किया है कि संगठन में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या गलत तत्वों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वरिष्ठ नेताओं से मार्गदर्शन प्राप्त कर और सभी चेहरों की पृष्ठभूमि की अच्छी तरह से जांच-परख करने के बाद ही समिति का पुन: गठन करेंगे।
इन्हें किया गया था शामिल
कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष पद पर मुकेश वंशकार, विमलेश चौधरी, अंशुल सोनकर, अनिल चौधरी, आशीष चडार, जिला महामंत्री विजय सागर, अभिषेक दाहिया और मंत्री पद पर दीपक झारिया, मुकेश चौधरी, बृजेन्द्र मेहरा, द्रोपती चौधरी, राजेश अहिरवार, सतीष झारिया को नियुक्त किया गया था । जबकि कोषाध्यक्ष ललित चौधरी, सह कोषाध्यक्ष कैलाश झारिया, कार्यकाल मंत्री अशोक पटेल, सह कार्यालय मंत्री आशीष झारिया को बनाया गया था । इसके अलावा केशल, सूरज, अमन, अजय, ओमप्रकाश, रवि, उमेश, दौलत, संतोष, सतीश, दीपक , जुगल, , रानी, पूनम, अजय, महेश, अयोध्या को भी जिम्मेदारियां सौंपी गई थी।
