प्रतिमा बागरी के एससी प्रमाण पत्र को हाईकोर्ट में चुनौती

भोपाल। राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाण पत्र को राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति द्वारा वैध ठहराए जाने के बाद यह मामला अब न्यायालय की दहलीज तक पहुंचने जा रहा है। शिकायतकर्ता एवं मध्य प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने समिति के निर्णय को खारिज करते हुए इसे सरकारी दबाव में लिया गया फैसला बताया और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती देने की घोषणा की है।

शुक्रवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में अहिरवार ने आरोप लगाया कि जांच समिति ने संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश-1950, वर्ष 1961 एवं 1971 की जनगणना के अभिलेख तथा वर्ष 1998-99 में जनजातीय अनुसंधान संस्थान (टीआरआई) की मानवशास्त्रीय रिपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की अनदेखी की। उनका दावा है कि उक्त रिपोर्ट में विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र के बागरी समाज को अनुसूचित जाति नहीं, बल्कि राजपूत/ठाकुर समुदाय का उपसमूह बताया गया है।

अहिरवार ने कहा कि प्रतिमा बागरी का परिवार पिछले सौ वर्षों से सतना में निवास कर रहा है, जबकि ऐतिहासिक रूप से बागरी समुदाय को अनुसूचित जाति का लाभ मालवा, निमाड़ और मध्य भारत क्षेत्र के निवासियों के लिए लागू था। उन्होंने वर्ष 1976 के बाद अनुसूचित जाति सूची में हुए संशोधनों और वर्ष 2007 की राजपत्र अधिसूचना की समिति द्वारा की गई व्याख्या पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने समिति की रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण बताते हुए कहा कि पूरे मामले को ऐतिहासिक अभिलेखों और सरकारी दस्तावेजों के आधार पर उठाया गया है। यदि हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली तो वह इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाएंगे।

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