नयी दिल्ली, 17 जुलाई (वार्ता) वैश्विक वस्त्र प्रदर्शनी भारत टेक्स के तीसरे संस्करण से 2.8 अरब डॉलर की अतिरिक्त बिक्री के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम् में चार दिवसीय प्रदर्शनी के अंतिम दिन शुक्रवार को संवाददाताओं से बात करते हुए भारत टेक्स ट्रेड फेडरेशन (बीटीटीएफ) के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार गोयंका ने एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी। प्रदर्शनी को बेहद सफल बताते हुए उन्होंने बताया कि पहले तीन दिन में ही राज्य सरकारों ने 30 से अधिक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये जिनमें इस क्षेत्र में लगभग 14,300 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जतायी गयी है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में 75 प्रतिशत प्रदर्शक ऐसे हैं जो पहले के संस्करणों में भी शामिल हो चुके हैं। यह बताता है कि प्रदर्शनी उनके लिए व्यवसाय बढ़ाने में सहायक रही है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भारत टेक्स 2026 के दौरान कर्नाटक में 2,821 करोड़ रुपये के निवेश के लिए एमओयू हुए जिससे 11,020 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। बिहार ने 1,476 करोड़ रुपये के निवेश के लिए समझौता किया है जिससे 40,500 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे। महाराष्ट्र में 1,095 करोड़ रुपये और आंध्र प्रदेश में 4,100 करोड़ रुपये के निवेश के लिए एमओयू किये गये हैं। इसके अतिरिक्त रीएंडअप ने भारत में 4,800 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की।
बीटीटीएफ के सह-अध्यक्ष भद्रेश डोडिया ने कहा कि प्रदर्शनी में 138 देशों के प्रतिनिधि आये थे जिनमें 19 देशों की प्रदर्शनी भी थी। उन्होंने कहा कि लातिन अमेरिकी देशों में भारतीय वस्त्र उद्योग की पहुंच कम थी। इस बार दुनिया के उस हिस्से से भी लोग आये थे। भारत टेक्स के बाद लातिन अमेरिकी बाजारों में भारत की पहुंच बढ़ने की उम्मीद है।
विज्ञप्ति के अनुसार, भारत टेक्स में 1,647 प्रदर्शकों, लगभग 95,000 व्यावसायिक आगंतुकों, 11,315 खरीदारों (6,090 अंतरराष्ट्रीय खरीदार समेत), तथा 138 देशों से 3,461 प्रतिनिधियों और प्रतिभागियों ने भाग लिया। देश की वैश्विक परिधान निर्माण क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में इंटरनेशनल अपैरल फेडरेशन की बोर्ड बैठक भी भारत टेक्स के दौरान ही आयोजित की गयी। इसके अलावा, बीटीटीएफ और प्रीमियर विज़न पेरिस के बीच लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किये गये। इसका उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ के बीच वस्त्र साझेदारी को मजबूत करना, बाजार पहुंच बढ़ाना, टिकाऊ सोर्सिंग, डिजाइन इंटेलिजेंस और खरीदार-विक्रेता सहयोग को बढ़ावा देना है। श्री गोयंका संवाददाताओं के एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि दुनिया के कई देशों में अतिरिक्त शुल्क भारतीय वस्त्र उद्योग के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है। सरकार तेजी से व्यापार संधियों के माध्यम से उसका समाधान कर रही है।

