भोलेनाथ की नगरी में गुंजा जय जगन्नाथ, इस्कॉन और जगदीश मंदिर में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब 

उज्जैन। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के पावन अवसर पर गुरुवार को धर्मधानी उज्जैन भगवान श्री जगन्नाथ की भक्ति में पूरी तरह सराबोर नजर आई। भोलेनाथ की नगरी में दिनभर ‘जय जगन्नाथ’ और ‘हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरेज् हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे’ के जयघोष गूंजते रहे। ढोल-नगाड़ों, भजन-कीर्तन, पुष्पवर्षा और श्रद्धा के माहौल के बीच शहर में दो स्थानों से भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्राएं निकलीं। हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के रथ अपने हाथों से खींचकर पुण्य लाभ अर्जित किया।

इस वर्ष भी उज्जैन में दो प्रमुख रथ यात्राएं निकलीं। पहली यात्रा इस्कॉन मंदिर प्रबंधन द्वारा और दूसरी करीब 100 वर्ष पुरानी परंपरा के अनुसार खाती समाज द्वारा निकाली गई। दोनों यात्राओं में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं, युवा और बच्चे शामिल हुए।

इस्कॉन मंदिर की रथ यात्रा दोपहर 1.30 बजे इंदिरा नगर चौराहे से प्रारंभ हुई। यात्रा में तीन अलग-अलग रथ शामिल किए गए। भगवान बलभद्र ‘तालध्वज’, देवी सुभद्रा ‘दर्पदलन’ और भगवान जगन्नाथ 35 फीट ऊंचे भव्य ‘नंदीघोष’ रथ पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देने निकले।

यात्रा में भजन मंडलियां, आकर्षक झांकियां और संकीर्तन की टोलियां शामिल रहीं। पूरे मार्ग पर श्रद्धालु हरे कृष्ण महामंत्र का संकीर्तन करते हुए चल रहे थे। इस्कॉन मंदिर की ओर से मार्ग में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया तथा भोजन प्रसाद (भंडारे) का भी आयोजन किया गया। राघव पंडित दास के अनुसार भगवान की विशेष पोशाक तैयार करने के लिए बंगाल से दस कलाकारों को बुलाया गया था। करीब दो माह की मेहनत से रेशमी वस्त्रों, जापान से मंगाए गए विशेष धागों, मोतियों और जरी से भगवान के लिए विशेष पोशाक तैयार की गई।

यात्रा इंदिरा नगर चौराहा, आगर रोड, चामुंडा चौराहा और टॉवर चौक होते हुए देवास रोड स्थित श्री महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ परिसर पहुंची, जिसे गुंडिचा नगरी के रूप में सजाया गया था। यहां विशेष पूजा-अर्चना के बाद भगवान आठ दिन के विश्राम के लिए विराजमान हुए।

 

 

100 साल पुराना लकड़ी का रथ-10000 समाज जन जुटे

दूसरी ओर कार्तिक चौक स्थित भगवान जगदीश मंदिर से खाती समाज की पारंपरिक रथ यात्रा दोपहर बाद निकली। इस यात्रा में भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ एक ही विशाल लकड़ी के रथ पर विराजमान हुए। करीब 100 वर्ष पुराना यह रथ जगन्नाथपुरी की तर्ज पर तैयार किया गया है, जिसे समाजजन अपने हाथों से खींचते हैं। रथ यात्रा में दो बैंड, दो अखाड़े, धार्मिक झांकियां तथा लगभग दस हजार समाजजन शामिल हुए। प्रदेशभर के करीब 1200 गांवों से आए श्रद्धालुओं ने रथ खींचकर अपनी आस्था व्यक्त की। यात्रा प्रारंभ होने से पहले भगवान का अभिषेक, महाआरती एवं विशेष पूजन किया गया, जिसके बाद भगवान के विग्रह को विधि-विधान से रथ में विराजमान कराया गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी खाती समाज की रथ यात्रा में शामिल हुए। उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ करीब 100 वर्ष पुराने लकड़ी के रथ को अपने हाथों से खींचकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद लिया।

 

पुन: मंदिर पहुंची यात्रा

 

खाती समाज की यात्रा कार्तिक चौक स्थित जगदीश मंदिर से प्रारंभ होकर मोढ़ की धर्मशाला, दानी गेट, शिप्रा की छोटी रपट, ढाबा रोड, कमरी मार्ग चौराहा, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और बक्षी बाजार होते हुए पुन: जगदीश मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई। यात्रा के दौरान शिप्रा तट पर मां शिप्रा की आरती भी की गई। इन दोनों भव्य रथ यात्राओं ने एक बार फिर उज्जैन की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक एकता की अद्भुत छवि प्रस्तुत की। शहर में भक्ति, सेवा और उत्साह का वातावरण बना रहा तथा श्रद्धालुओं ने भगवान के रथ खींचकर स्वयं को धन्य माना।

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