भोपाल: मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार पिछले एक सप्ताह से धीमी पड़ गई है। लगातार सात दिनों से प्रदेश में कहीं भी भारी या अति भारी बारिश नहीं हुई, जिसके चलते जबलपुर समेत 35 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार अब तक प्रदेश में 241.8 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य 270.3 मिमी की तुलना में 11 प्रतिशत कम है। सबसे ज्यादा असर प्रदेश के पूर्वी हिस्से—जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग—में देखने को मिल रहा है, जहां 24 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य से 2 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है।
बारिश की कमी का सबसे बड़ा असर खेती पर पड़ रहा है। किसानों को फसलों की सिंचाई की चिंता सताने लगी है, क्योंकि खेतों में पर्याप्त नमी नहीं है। तालाब, बांध और जलाशय भी उम्मीद के मुताबिक नहीं भर पाए हैं, जिससे आने वाले दिनों में जल संकट की आशंका बढ़ सकती है। कई जिलों में बारिश नहीं होने से तेज गर्मी और उमस ने लोगों की परेशानी भी बढ़ा दी है।
मौसम विभाग के मुताबिक गुरुवार को इंदौर, झाबुआ, धार, बुरहानपुर, खंडवा, नर्मदापुरम, जबलपुर, रीवा, सतना, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर समेत कई जिलों में हल्की बारिश और आंधी चलने की संभावना है। वहीं भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, ग्वालियर, शिवपुरी, उज्जैन, देवास, शाजापुर, रतलाम और मंदसौर सहित कई जिलों में गर्मी और उमस का असर बना रह सकता है।
राहत की बात यह है कि 19 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होने जा रहा है। इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी में नया मौसम सिस्टम और साइक्लोनिक सर्कुलेशन भी बन रहा है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये सिस्टम मजबूत रहे, तो जुलाई के दूसरे पखवाड़े में मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। इससे किसानों को राहत मिलेगी, जलाशयों का जलस्तर बढ़ेगा और प्रदेश में मानसून फिर से रफ्तार पकड़ सकता है।
