ईंधन निर्यात पर विंडफॉल टैक्स में मोदी सरकार ने की भारी बढ़ोतरी, आम आदमी की जेब पर नहीं पड़ेगा कोई सीधा असर

नई दिल्ली, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते केंद्र सरकार ने ईंधन निर्यात शुल्क में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। नई अधिसूचना के अनुसार, डीजल पर विंडफॉल टैक्स को 8.5 रुपये से बढ़ाकर 15.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ (ATF) पर 7.5 रुपये से बढ़ाकर 14.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। हालांकि, निर्यातकों को राहत देते हुए पेट्रोल पर ड्यूटी को 4 रुपये से घटाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर किया गया है।

टैक्स वृद्धि के पीछे के कारण

सरकार की यह नीतिगत कार्रवाई मुख्य रूप से घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी अस्थिरता के कारण तेल शोधन कंपनियों को मिलने वाले बेतहाशा मुनाफे पर अंकुश लगाने के लिए सरकार विंडफॉल टैक्स का उपयोग करती है। यह निर्णय हर पखवाड़े वैश्विक हालातों की समीक्षा के बाद लिया गया है, ताकि देश की राजकोषीय स्थिति को सुरक्षित रखते हुए ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा सके।

आम उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव

आम नागरिकों के लिए राहत की बात यह है कि विंडफॉल टैक्स में हुई इस बढ़ोतरी का देश के पेट्रोल पंपों पर मिलने वाली ईंधन की कीमतों पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। यह टैक्स केवल तेल शोधन कंपनियों द्वारा किए जाने वाले निर्यात पर ही लागू होता है। 16 जुलाई 2026 को देश के प्रमुख महानगरों, जैसे दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें पूरी तरह स्थिर बनी हुई हैं, जिससे जनता को महंगाई का कोई अतिरिक्त बोझ नहीं झेलना पड़ेगा।

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