तिरुवनंतपुरम, (वार्ता) केरल मूल के भारतीय-अमेरिकी नासा अंतरिक्ष यात्री डॉ अनिल मेनन (49) मंगलवार को कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से रूस के सोयुज एमएस-29 अंतरिक्ष यान से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के लिए रवाना हो गये।
चिकित्सक, इंजीनियर और अमेरिकी वायु सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल मेनन आईएसएस जाने वाले मलयाली मूल के पहले व्यक्ति बन गये हैं। इस आठ महीने के मिशन में उनके साथ रूसी अंतरिक्ष यात्री प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना भी शामिल हैं।
पलक्कड़ जिले के प्रसिद्ध पालट परिवार से ताल्लुक रखने वाले डॉ मेनन स्वतंत्रता सेनानी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष चेत्तूर शंकरन नायर के वंशज हैं। उनके पिता शंकरन मेनन ओत्तपालम के रहने वाले हैं और मां एलिजाबेथ का परिवार यूक्रेन से अमेरिका जाकर बसा था।
गोवा मुक्ति संग्राम (1961) में मुख्य भूमिका निभाने वाले लेफ्टिनेंट जनरल केपी कांदेथ भी उनके परिवार से संबंधित हैं।
नासा में शामिल होने से पहले, उन्होंने अमेरिकी वायु सेना में फ्लाइट सर्जन के रूप में सेवाएं दीं और अफगानिस्तान में भी तैनात रहे। उन्होंने पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम के तहत भारत में भी काम किया है।
वर्ष 2018 में वे स्पेसएक्स के पहले फ्लाइट सर्जन और मेडिकल डायरेक्टर बने थे। इसके बाद 2021 में उन्हें नासा के अंतरिक्ष यात्री वर्ग के लिए चुना गया।
आठ महीने के इस प्रवास के दौरान डॉ. मेनन अंतरिक्ष में मानव शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों (रक्त संचार और तंत्रिका तंत्र में बदलाव) पर शोध करेंगे। साथ ही, वे भविष्य के चंद्रमा और मंगल मिशनों के लिए माइक्रोग्रेविटी में आईवी फ्लूइड्स बनाने की तकनीक, ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) और एआई आधारित अल्ट्रासाउंड जांच पद्धतियों का परीक्षण करेंगे।
