नयी दिल्ली, 14 जुलाई (वार्ता) केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पश्चिम बंगाल के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के लिए सड़क एवं राजमार्ग, रेलवे, मेट्रो, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, कोयला तथा श्रम क्षेत्रों से संबंधित 82,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 19 महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर बल दिया जा रहा है।
उन्होंने मंगलवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और अन्य के साथ कोलकाता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए यह बात कही।
श्री चौहान ने मुख्यमंत्री के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि परियोजनाओं के पूरा होने में आ रही दिक्कतों तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय से जुड़ी लंबित समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। श्री चौहान ने अवसंरचना परियोजनाओं की नियमित समीक्षा का उल्लेख करते हुए पश्चिम बंगाल में राज्य स्तरीय प्रोजेक्ट निगरानी समूह के गठन का सुझाव दिया।
श्री चौहान ने ग्रामीण विकास का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने बंगाल के लिए 8,508 करोड़ रु. से अधिक की राशि स्वीकृत की है। राज्य सरकार के हिस्से के साथ कुल संसाधन 12,064 करोड़ से ऊपर होंगे जो 31 मार्च तक पंचायतों के माध्यम से सीधे गांवों में जाएंगे। उन्होंने कहा कि वीबी-जीरामजी के तहत टिकाऊ परिसंपत्तियों- सड़क, तालाब, छोटे सिंचाई ढांचे, स्कूल–आंगनबाड़ी भवन पर खास ध्यान रहेगा।
श्री चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत प. बंगाल के लिए एक लाख मकानों की अंतरिम स्वीकृति दी गई है। उन्होंने कहा कि भारी बारिश की वजह से लाभार्थी सर्वे का काम तय समय तक पूरा नहीं हो पाया, इसलिए सर्वे की समय सीमा बढ़ाकर 15 अगस्त की गई है ताकि पात्र परिवारों की सही पहचान हो सके और कोई वंचित न रहे। दीनदयाल अंत्योदय योजना के तहत पश्चिम बंगाल के महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए वित्तीय मजबूती की घोषणा करते हुए श्री चौहान ने बताया कि इन्हें 245 करोड़ रु. का बैंक लोन और 50 करोड़ रु. का धन दिया जा रहा है।
क्लीन प्लांट प्रोग्राम के तहत देशभर में नौ क्लीन प्लांट सेंटर शुरू किए जाने के संदर्भ में श्री चौहान ने कहा कि मालदा जैसे फल समृद्ध क्षेत्रों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। मालदा क्लीन प्लांट/ग्रीन प्लांट सुविधा का उद्देश्य आम, लीची और अन्य फलों के लिए रोगमुक्त, उच्च गुणवत्ता वाले पौधे तैयार करना है ताकि किसानों को बेहतर पौध, अच्छी पैदावार और निर्यात–गुणवत्ता के फल मिल सकें। उन्होंने बताया कि क्लीन प्लांट प्रोग्राम के तहत आधुनिक नर्सरी सिस्टम बनाया जा रहा है जिसमें बड़ी नर्सरी को तीन करोड़ रु. और मध्यम नर्सरी को 1.5 करोड़ रु. तक की सहायता दी जाएगी ताकि हर साल करोड़ों क्लीन प्लांट किसानों तक पहुँच सकें।
श्री चौहान ने पश्चिम बंगाल के “राइस बाउल” क्षेत्रों में पोषण संवर्धन, वैल्यू चेन विकास और प्रोसेसिंग सुविधाओं के लिए विशेष प्रोजेक्ट को मंजूरी देने की जानकारी भी दी। इन प्रोजेक्ट्स के तहत पोषणयुक्त धान, मक्का बीज उत्पादन, स्टोरेज–प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर काम होगा ताकि किसानों को ज्यादा दाम और स्थिर बाजार मिल सके।
उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल को पूर्वी भारत का “सीड हब” बनाया जाएगा। आलू बीज, हाइब्रिड मक्का बीज और अन्य फसलों के बीज उत्पादन के लिए राज्य सरकार के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किये गये हैं। इसके साथ ही ऑर्किड और बागवानी के लिए प्रोजेक्ट्स स्वीकृत हैं, जिससे विशेष जलवायु वाले इलाकों में फूलों और उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती से किसानों की आमदनी बढ़ेगी।
श्री चौहान ने कहा कि आईसीएआर, राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिकों के साथ मिलकर बंगाल के लिए एक वैज्ञानिक “एग्रीकल्चर रोडमैप” तैयार किया जा रहा है। इसमें कृषि मौसम के हालात, मिट्टी, पानी और स्थानीय संसाधनों की स्थिति के आधार पर कौन–सी फसल कहाँ, किस तकनीक से और किस वैल्यू चेन मॉडल के साथ लगानी है, इसका विस्तार से खाका तैयार होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि चावल अनुसंधान केंद्रों को “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” के रूप में विकसित करने पर काम हो रहा है ताकि पश्चिम बंगाल धान, आलू और मक्का जैसे क्षेत्र पैदावार का मॉडल बन सके। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि बंगाल में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन, पीएम धन–धान्य कृषि योजना, डिजिटल एग्रीटेक और पोषण संवर्धन जैसे कार्यक्रमों से पूरा कृषि परिदृश्य बदलने वाला है।
