रेलवे माल परिवहन व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए वैष्णव ने घोषित किये आठ नये सुधार, कंटेनर ट्रेनों के लिए नयी एकीकृत लाइसेंस व्यवस्था

नयी दिल्ली 14 जुलाई (वार्ता) माल ढुलाई की व्यवस्था को आधुनिक, सुविधाजनक, पारदर्शी और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए रेलवे ने कई अहम सुधार किये है, जिसमें बंद वैगनों के जरिये फ्लाई ऐश के सुरक्षित परिवहन और कंटेनरों के संचालन के लिए कंटेनर ट्रेन परिचालन लाइसेंस की नयी एकीकृत व्यवस्था जैसी महत्वपूर्ण पहलें शामिल हैं।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार रेल भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में ’52 सप्ताह 52 सुधार’ लाने के अभियान के तहत इन आठ अहम सुधारों की घोषणा करते हुए कहा कि ये नयी पहलें रेलवे में लगातार सुधारों लाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्पों से प्रेरित हैं। इस अभियान के तहत नौ बड़े सुधार पहले ही किए जा चुके हैं और इस संगठन को और अधिक आधुनिक, पारदर्शी, सुगम तथा उद्योगोमुखी बनाने के लिए आठ नये सुधार किये गये हैं।

रेलवे ने आज जो आठ नये सुधार घोषित किये हैं, उनमें पहला ( अभियान का 10वां) सुधार फ्लाई ऐश की सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन व्यवस्था है। रेलमंत्री वैष्णव ने बताया कि देश में हर साल निर्माण कार्यों के लिए हर साल करीब 9.6 करोड़ टन फ्लाई ऐश का इस्तेमाल होता है, जिसका सही निपटान न होने पर यह पर्यावरण के लिए खतरा उत्पन्न होता है। इसी के मद्देनजर फ्लाई ऐश का परिवहन बंद वैगनों के जरिये करने का निर्णय लिया गया है।

रेलवे ने इसके लिए विशेष कंटेनर तैयार किए हैं, जिनमें ऊपर से लोडिंग होगी, जिससे यह प्रक्रिया आसान और सुरक्षित हो जाएगी। उन्होंने कहा, ” पर्यावरण के लिए नुकसानदेह चीज़ को हम काम की चीज़ में बदलने सकते हैं? इसी सोच के साथ यह सुधार किया गया। अगर हम फ्लाई ऐश के परिवहन की अच्छी प्रणाली बना लेते हैं, तो हम इसका इस्तेमाल आर्थिक रूप से कर सकते हैं, जैसे सीमेंट बनाने में, सड़क बनाने में या किसी और तरह के निर्माण कार्य में।”

रेलवे में 11वां सुधार कंटेनर व्यवसाय के लिए नयी एकीकृत लाइसेंस व्यवस्था है। रेलमंत्री ने बताया कि रेलवे कंटेनर परिचालन के लिए अब ‘एकीकृत लाइसेंस’ व्यवस्था ला रहा है ताकि अधिक से अधिक कंपनियां और लोग इस कारोबार से जुड़ सकें। नयी नीति अगले 20 वर्षों के लिए लागू रहेगी, जिससे उद्योगों को काम करने में स्थिरता मिलेगी और नियमों की कमियां दूर होंगी। उन्होंने बताया कि सभी मार्गों के लिए समान गैर-वापसी योग्य पंजीकरण शुल्क 25 करोड़ रुपये निर्धारित किये हैं। उन्होंने बताया कि रेलवे ने कंटेनर ट्रेन परिचालकों (सीटीओ) के लिए पुरानी लाइसेंस व्यवस्था में चार श्रेणियां थीं और अलग-अलग पंजीकरण शुल्क 50 करोड़ रुपयये से 10 करोड़ रुपये तक का प्रावधान था, जिसे समाप्त कर दिया गया है।

श्री वैष्णव ने बताया कि 12वां सुधार उर्वरकों की ढुलाई और भाड़े की पारदर्शी व्यवस्था है। अभी तक उर्वरक मालभाड़े की व्यवस्था में 50 अलग-अलग स्लैब थे, लेकिन अब मालभाड़ा सीधे ‘प्रति टन प्रति किलोमीटर’ के आधार पर तय होगा। मौजूदा समय में उर्वरकों की ढुलाई में रेलवे की 85 प्रतिशत हिस्सेदारी है। अब उर्वरकों की ढुलाई कंटेनरों के जरिए भी की जा सकेगी।

रेल मंत्री ने 13वें सुधार के तौर पर रेल परियोजनाओं के श्रमिकों के लिए ‘कौशल प्रमाणपत्र ‘ को आवश्यक बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि रेलवे परियोजनाओं में काम करने वाले सभी श्रमिकों और कर्मचारियों के लिए ‘रेलवे कौशल प्रमाणन ढांचा’ लागू किया जाएगा। इससे सुनिश्चित होगा कि काम करने वाले लोग प्रशिक्षित और कुशल हों।

उन्होंने 14वें सुधार के तौर पर निर्माण कार्यों और ठेकेदारी नियमों में बदलाव की घोषणा की। उन्होंने बताया कि अनुबंध की शुरुआत में ही 10 प्रतिशत निष्पादन सुरक्षा जमा करानी होगी। इसके बाद रनिंग बिल से कोई कटौती नहीं की जाएगी। इसके लिए केवल वही कंपनियां पात्र होंगी जिनके लंबित कानूनी विवाद उनकी नेट वर्थ के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हैं। ठेकेदारों के लिए ‘ऑल रिस्क इंश्योरेंस’ और ‘प्रोफेशनल इंडेम्निटी इंश्योरेंस’ को अनिवार्य कर दिया गया है।

रेलमंत्री ने बताया कि जमीन अधिग्रहण को पूरी तरह डिजिटल बनाने के लिए रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र क्रिस द्वारा विकसित ‘रेल भूमि वेब पोर्टल शुरू किया गया है। इससे कागजी काम खत्म होगा और मुआवजा वितरण तथा कानूनी समय-सीमा की वास्तविक समय में निगरानी हो सकेगी।

रेल में सुधार अभियान की 15वीं पहल वैगन डिजाइन में उद्योगों को छूट से संबंधित है। उन्होंने कहा कि अब कोई भी कंपनी या उद्योग अपनी जरूरत के हिसाब से वैगन का डिजाइन तैयार कर सकेगा। पहले वैगनों का डिजाइन केवल अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) ही बनाता था और भारतीय रेलवे मानक (आईआरएस) के स्वीकृत पुर्जों के उपयोग की बाध्यता के कारण नयी तकनीक और नवाचार की गुंजाइश बेहद कम थी। अब कंपनियां खुद डिजाइन बना सकती हैं, जिसे सुरक्षा मानकों पर परखने के बाद आरडीएसओ अंतिम मंजूरी देगा।

श्री वैष्णव ने कहा कि 16वां सुधार तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के परिवहन का आधुनिकीकरण करना है। उन्होंने कहा कि अब तक पेट्रोलियम और तेल उत्पादों की ढुलाई वाले टैंक वैगन केवल रेलवे के ही मालिकाना हक में होते थे। अब तेल कंपनियां अपनी जरूरत के हिसाब से विशेष टैंक वैगन डिजाइन करा सकती हैं और इन्हें सीधे खरीद या लीजिंग एजेंसियों से लीज पर ले सकती हैं।

उन्होंने कहा कि 17वां सुधार अनाजों के परिवहन से संबंधित है। अब अनाजों का परिवहन कंटेनरों में किया जाएगा, जिससे अनाजों की बर्बादी कम होगी। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ढुलाई के दौरान होने वाले चार से पांच प्रतिशत अनाज और दालों के नुकसान को रोकने के लिए अब इनके परिवहन को कंटेनरों में करने की मंजूरी दे दी गयी है। इससे अनाज नमी, धूल और गंदगी से सुरक्षित रहेगा और इसका किराया भी अब ‘प्रति टन प्रति किलोमीटर’ के पारदर्शी आधार पर तय होगा।

रेल मंत्री ने कहा, ‘प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में भारतीय रेलवे लगातार विकास के पथ पर अग्रसर है। चाहे वह रेल संपत्तियों की सुरक्षा से जुड़े जमीनी रिफॉर्म्स हों या फिर माल ढुलाई और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े बड़े नीतिगत बदलाव, हमारा ध्यान पारदर्शिता, सुरक्षा और दक्षता बढ़ाने पर केंद्रित है।

 

 

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