पड़ताल: सखी सेंटर में 2,349 ने न्याय की गुहार, चारदीवारी में भी सुरक्षित नहीं नारी

अज़हर खान

जबलपुर: घर की चारदीवारी के भीतर संस्कारधानी की महिलाएं आज भी सबसे असुरक्षित हैं। सखी सेंटर में बीते डेढ़ साल में 18 महीनों के अंदर जनवरी 2025 से 30 जून 2026 तक कुल 2,349 पीडि़त न्याय की गुहार लगाई हैं इनमें से अकेले 2,080 मामले घरेलू हिंसा के हैं मतलब महिलाएं अपनों के जुल्म का ही शिकार हो रही। यह आंकड़े न केवल बेहद चौंकाने वाले है बल्कि संस्कारधानी कहे जाने वाले जबलपुर में महिलाओं की सुरक्षा और उनके पारिवारिक परिवेश को लेकर चिंताजनक और कड़वी हकीकत बयां कर रहे है कि सुरक्षा का दम भरने वाले परिवारों के बंद कमरों के पीछे महिलाओं पर किस कदर मानसिक और शारीरिक जुल्म ढहाया जा रहा है
नवभारत को पड़ताल के दौरान जबलपुर के वन स्टॉप सेंटर (सखी) के प्रशासनिक रिपोर्ट के आंकड़े केवल एक सरकारी टेबल की सांख्यिकी नहीं हैं, बल्कि यह समाज की उस सोच पर करारा तमाचा भी है जो महिलाओं को पूजनीय तो कहती है, लेकिन बंद कमरों में उन्हें प्रताडि़त करने से बाज नहीं आ रहा है। यह साफ गवाही दे रहे है कि महिलाएं बाहर की दुनिया से ज्यादा अपने ही घरों में असुरक्षित हैं। अब जरूरत केवल कानूनी कार्रवाई की नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और घरेलू संस्कारों को बदलने की भी है।
घर बन रहे नरक: हर 10 में से 9 महिलाएं प्रताडि़त-
सखी सेंटर में दर्ज यह आंकड़े समाज का कड़वा सच बयां करने वाला आईना है। कुल मामलों में से 88.5 प्रतिशत हिस्सेदारी सिर्फ घरेलू हिंसा की है। जिन हाथों पर सुरक्षा का भरोसा था, वही हाथ प्रताडऩा दे रहे हैं। ये आंकड़े महिला सुरक्षा अभियानों की जमीनी हकीकत को भी बयां कर रहे है। साथ ही यह आंकड़े यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि तमाम कड़े कानूनों और जागरूकता अभियानों के बाद भी समाज में महिलाओं की स्थिति कितनी संवेदनशील बनी हुई है?
दरिंदगी, ब्लैकमेलिंग, दहेज उत्पीडऩा का शिकार, नौनिहालों पर भी सितम-
18 महीनों में महिलाएं साइबर, ब्लैकमेलिंग और ऑनलाइन धोखाधड़ी का भी शिकार होकर सखी सेंटर पहुंचीं है। समाज की दरिंदगी का आलम यह है कि इस अवधि में बलात्कार, दहेज उत्पीडऩ के मामले भी पहुंचे। इतना ही नहीं बाल विवाह और बाल यौन शोषण के मामले यह बताने के लिए काफी है कि बच्चों का बचपन निगलने वाले भेडि़ए इसी समाज में खुलेआम घूम रहे हैं और उन पर सितम ढाहाया जा रहा है इसके अलावा महिलाएं साइबर क्राइम ब्लैकमेलिंग, अश्लीलता का भी शिकार हुईं। गुमशुदगी और अपहरण से लेकर बेसहारा छोड़ी गई महिलाओं से लेकर अनाथ बच्चे की मौजूदगी यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर हमारा सामाजिक ताना-बाना किस दिशा में जा रहा है?
जुल्म पर उठती आवाज, सुलह से भर रही रिश्तों की दरार-
इन डरावने आंकड़ों के बीच राहत की बात सिर्फ इतनी है कि अब महिलाएं जुल्म को किस्मत मानकर चुप बैठने वाली नहीं हैं। वन स्टॉप सेंटर (सखी) की चौखट पर पहुंच रही मामले सबूत है कि महिलाएं अब थानों के चक्कर काटने के बजाय एक ही छत के नीचे कानूनी, मेडिकल और मानसिक मदद की ताकत को पहचान चुकी हैं जहां कार्रवाई के साथ आधे मामले तो सुलह से ही निपट रहे है और रिश्तों में आई दरार भी भर रही है लेकिन महिला हिंसा के बढ़ते मामले बेहद चिंताजनक है कि आखिर कब तक बेटियां और महिलाएं अपनों के ही हाथों इस तरह लहूलुहान और प्रताडि़त होती रहेंगी।

प्रशासक, वन स्टॉप सेंटर (सखी) जबलपुर कार्यालय में दर्ज मामले-

घरेलू हिंसा – 2080

बाल विवाह – 2

बाल यौन शोषण -1

बलात्कार – 13

दहेज उत्पीडऩा – 5

किसी अन्य प्रकरण का अपराध -1

गुमशुदगी अपहरण – 49

साइबर अपराध- 16

अनाथ- 1

अन्य- 131

छेड़छाड़- 9

लिव इन रिलेशन- 41

कुल- 2349

1 जनवरी 2025 से 30 जून 2026 तक के आंकड़े

इनका कहना है
हर मामले को पूरी संवेदनशीलता के साथ सुना जाता है। घरेलू हिंसा में पहली प्राथमिकता परिवार को टूटने से बचाने औरकाउंसलिंग के जरिए आपसी समझाइश की होती है। 50 प्रतिशत मामलों में समझौते हो रहे है जबकि 40 ऐसे मामले है जो कोर्ट भेजे जा रहे है। 10 प्रतिशत मामलों में महिलाएं शिकायत करने के बाद आगे की कार्रवाई नहीं चाहती है ।
गायत्री दीक्षित, वन स्टॉप सेंटर, अधिकारी

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