कोलकाता, (वार्ता) भारत के कृषि कार्यबल में 64.4 प्रतिशत हिस्सेदारी महिलाओं की है लेकिन शीर्ष कृषि और उससे संबंधित कंपनियों में उनकी मौजूदगी महज छह से 10 प्रतिशत तक सीमित है।
भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद (आईआईएमए) और गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड की “कृषि व्यवसाय में महिलाएं-अवसर और चुनौतियां” विषय से शुक्रवार को जारी संयुक्त रिपोर्ट में इस आशय का खुलासा हुआ है। यह रिपोर्ट गोदरेज एग्रोवेट के दूसरे महिला कृषि शिखर सम्मेलन में पेश की गई, जो कृषि में समावेशिता, नवाचार और समान विकास को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदमों का खाका पेश करती है।
गोदरेज एग्रोवेट के प्रबंध निदेशक बलराम सिंह यादव ने कहा, “कृषि व्यवसाय का भविष्य महिलाओं को शिक्षा, कार्यस्थल में समावेश और नेतृत्व के अवसरों से सशक्त बनाने में छुपा है। मार्गदर्शन, कौशल विकास और समावेशी माहौल के जरिए हम एक लचीला और न्यायसंगत क्षेत्र बना रहे हैं। पिछले साल हमने एक लाख महिलाओं को समर्थन देने का लक्ष्य रखा था और एक साल में 20 हजार महिलाओं तक सकारात्मक बदलाव पहुंचाकर हम गर्व महसूस कर रहे हैं।”
आईआईएमए की प्रोफेसर विद्या वेमिरेड्डी ने चिंता जताते हुए कहा, “कृषि में महिलाएं कार्यबल और शिक्षा का बड़ा हिस्सा हैं लेकिन औपचारिक रोजगार और नेतृत्व की भूमिकाओं में उनकी भागीदारी बेहद कम है। यह रिपोर्ट इस अंतर को पाटने के लिए जरूरी कदमों को रेखांकित करती है।”
रिपोर्ट में संसाधनों तक समान पहुंच, जेंडर संवेदनशील प्रशिक्षण और कार्यस्थल पर सुधारों की वकालत की गई है। साथ ही शिक्षा से रोजगार में बदलाव, नेतृत्व में हिस्सेदारी बढ़ाने और वित्तीय तकनीकी संसाधनों का उपयोग बदलाव की प्रमुख रणनीतियां बताई गई हैं।
शिखर सम्मेलन में गोदरेज एग्रोवेट और गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की कार्यकारी अध्यक्ष निसाबा गोदरेज ने ‘गोदरेज एग्रोवेट वीमेन इन एग्रीकल्चर स्कॉलरशिप’ की शुरुआत की, जो पांच छात्राओं को कृषि पढ़ाई में सहायता देगी और भविष्य की महिला नेताओं को तैयार करेगी।
कंपनी की मानव संसाधन प्रमुख मल्लिका मुटरेजा ने बताया, “कृषि अध्ययन में 30-40 प्रतिशत छात्राएं हैं लेकिन शीर्ष कंपनियों में सिर्फ छह से दस प्रतिशत ही पहुंच पाती हैं। यह असंतुलन उद्योग के लिए सक्रिय कदम उठाने की जरूरत को दर्शाता है।” उन्होंने कहा कि कंपनी ने वित्त वर्ष 25 में महिलाओं की हिस्सेदारी आठ से 12 प्रतिशत तक बढ़ा दी है और वित्त वर्ष 28 तक इसे 32 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। क्रेच और देखभाल नीतियों के जरिए महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
गोदरेज एग्रोवेट की सहायक कंपनी गोदरेज फूड्स लिमिटेड (जीएफएल) कर्नाटक, नासिक और मणिपुर जैसे क्षेत्रों में महिलाओं को बिक्री, विपणन और नेतृत्व भूमिकाओं में लाकर खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत कर रही है।
शिखर सम्मेलन में दो पैनल “कृषि में महिलाओं के लिए बाधाएं तोड़ना” और “बोर्डरूम से ब्रेकथ्रू : नेतृत्व में महिलाएं” चर्चाएं भी हुईं। इसमें उद्योग जगत की दिग्गज हस्तियों ने हिस्सा लिया। यह आयोजन कृषि में महिलाओं के योगदान को बढ़ावा देने और समावेशी भविष्य की दिशा में एक कदम साबित हुआ।
