नई दिल्ली, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में खुदरा महंगाई दर जून महीने में बढ़कर 4.38 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो मई में 3.93 प्रतिशत थी। इस वृद्धि में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों का योगदान है, जहां क्रमशः महंगाई दर 4.74 प्रतिशत और 3.92 प्रतिशत दर्ज की गई। सबसे अधिक चिंताजनक खाद्य महंगाई दर रही, जो मई के 4.78 प्रतिशत से बढ़कर जून में 5.32 प्रतिशत हो गई है। आम जनता की थाली से लेकर रोजमर्रा की वस्तुओं तक कीमतों में हुई इस वृद्धि ने आम आदमी के बजट को बुरी तरह प्रभावित किया है।
महंगी और सस्ती वस्तुओं की सूची
सालाना आधार पर जिन पांच चीजों के दामों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई, उनमें चांदी की ज्वेलरी (133.21%), अदरक (50.41%), सोना/हीरे/प्लेटिनम ज्वेलरी (36.82%), टमाटर (31.92%) और किशमिश (20.52%) शामिल हैं। इसके विपरीत, आलू, मटर, मोटर कार, जीरा और मोटर साइकिल जैसी वस्तुओं की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। राज्यों की बात करें तो तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा और मध्यप्रदेश में खुदरा महंगाई दर सबसे अधिक रही। इन आंकड़ों से साफ है कि खाद्य और गैर-खाद्य श्रेणियों में मूल्य अस्थिरता का असर व्यापक रूप से महसूस किया जा रहा है।
RBI का रुख और भविष्य की आशंकाएं
बढ़ती महंगाई को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सतर्क है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्वीकार किया है कि वैश्विक चुनौतियों के कारण महंगाई के जोखिम बढ़े हैं और आने वाले महीनों में यह आरबीआई की ऊपरी निर्धारित सीमा के करीब पहुंच सकती है। फिलहाल आरबीआई ने नीतिगत ब्याज दरों में बदलाव न करने का निर्णय लिया है और पूरी स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है। केंद्रीय बैंक का स्पष्ट रुख है कि वह आने वाले समय में आंकड़ों के आधार पर ही कोई ठोस निर्णय लेगा ताकि विकास और महंगाई के बीच संतुलन बना रहे।

