नयी दिल्ली, 13 जुलाई (वार्ता) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकारी बैंकों से अनिवासी भारतीय प्रवासियों के साथ अपने संपर्कों का और विस्तार करने, नये तरह के जमा उत्पादों को पेश करने और योजनाओं की शेष अवधि के दौरान धन जुटाने की गति को बनाए रखने का आह्वान किया है।
श्रीमती सीतारमण सोमवार को राजधानी में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों (पीएफआई) के प्रबंध निदेशकों (एमडी) और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के साथ बैठक में विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) [एफसीएनआर(बी)] जमा, बाह्य वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) और विदेशी मुद्रा उधार की स्वैपिंग ((ओएफसीबी अदल-बदल) के कारोबार की सुगमता के लिए की गयी पहलों पर बातचीत की। इस बैठक में वित्तीय सेवा विभाग, आर्थिक कार्य विभाग और राजस्व विभाग के सचिव, मुख्य आर्थिक सलाहकार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस वार्ता में उपस्थित थे।
वित्त मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार इस बातचीत के दौरान, केंद्रीय वित्त और कार्पोरेट मामलों की मंत्री श्रीमती सीतारमण ने इस दिशा में बैंकों की उत्साहजनक और उत्साहपूर्ण प्रारंभिक प्रतिक्रिया की सराहना की। विज्ञप्ति के अनुसार वित्त मंत्री ने बैंकों से अनिवासी भारतीय प्रवासियों तक अपनी पहुंच को और बढ़ाने, अभिनव जमा उत्पादों को पेश करने और योजनाओं की शेष अवधि के दौरान धन जुटाने की गति को बनाए रखने का आह्वान किया।
श्रीमती सीतारमण ने बैंकों से गिफ्ट सिटी में उपलब्ध वित्तीय सेवाओं और संस्थागत बुनियादी ढांचे का अधिकतम उपयोग करने का भी आग्रह किया।
बैठक में सरकार की ओर से कहा गया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, निजी क्षेत्र के बैंकों और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों की निरंतर और व्यापक भागीदारी, विदेशी मुद्रा प्रवाह को जुटाने, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और वैश्विक अनिश्चितता के बीच बाहरी क्षेत्र की मजबूती को बढ़ाने में स्वैप सुविधाओं की प्रभावशीलता को दर्शाती है।
इस बातचीत के दौरान, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और निजी वित्तीय संस्थानों के प्रबंध निदेशकों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों ने केंद्रीय वित्त मंत्री को एफसीएनआर (बी) जमा, ईसीबी और ओएफसीबी के लिए आरबीआई की स्वैप सुविधा योजनाओं के तहत हुई प्रगति से अवगत कराया।आरबीआई गवर्नर द्वारा 5 जून, 2026 के मौद्रिक नीति वक्तव्य में घोषित योजनाओं में नए एफसीएनआर (बी) जमा के लिए सममूल्य पर अमेरिकी डॉलर-रुपये की विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा और पात्र ईसीबी तथा ओएफसीबी के लिए एक रियायती स्वैप सुविधा शामिल की गयी है, जिसका उद्देश्य विदेशी पूंजी को आकर्षित करना, भुगतान संतुलन को मजबूत करना और पूंजी प्रवाह को प्रोत्साहित करना है। एफसीएनआर(बी) जमा राशि इस योजना के तहत 30 सितंबर, 2026 तक पात्र है, जबकि ईसीबी और ओएफसीबी 31 दिसंबर, 2026 तक पात्र हैं।
विज्ञप्ति के अनुसार इस बैठक में उल्लेख किया गया है कि भारतीय प्रवासियों ने इन पहलों के प्रति उत्साहजनक प्रतिक्रिया दी है, और एफसीएनआर (बी), ईसीबी और ओएफसीबी में अच्छी रुचि दिखाई दे रही है। प्रबंध निदेशकों ने यह भी बताया कि बैंक एफसीएनआर (बी) जमाओं पर आकर्षक रिटर्न दे रहे हैं, जिसमें पांच साल की जमाएं भी शामिल हैं, और इस योजना के तहत नई एफसीएनआर (बी) जमाओं पर ब्याज दर की सीमा को निलंबित करने से इसे और बल मिला है।
सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थानों के शीर्ष अधिकारियों ने बताया कि सिंगापुर, हांगकांग , पश्चिम एशिया, ब्रिटेन, अमेरिका और अन्य विदेशी क्षेत्रों में रहने वाले अनिवासी भारतीयों की ओर से काफी रुचि दिखाई गई है। उनकी ओर से सकारात्मक माहौल का लाभ उठाने और जमा राशि जुटाने में तेजी लाने की अपनी योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2026) के दौरान ईसीबी द्वारा जमा राशि जुटाने में और अधिक गति आएगी।
विज्ञप्ति के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने यह भी बताया कि उन्होंने प्रवासी भारतीयों से जुड़ने और जमा राशि जुटाने को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल चैनलों सहित अनुकूलित संपर्क रणनीतियां लागू की हैं। उन्होंने कहा कि बैंकों द्वारा दिए जा रहे आकर्षक रिटर्न के कारण एफसीएनआर(बी) जमा राशि जुटाने में स्पष्ट रूप से तेजी देखी जा रही है। उनकी ओर से बताया गया है कि गुजरात के गिफ्ट सिटी स्थित अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफएससी) में स्थित अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग इकाइयों (आईबीयू) का उपयोग ब्रिटेन, अमेरिका, पश्चिम एशिया, हांगकांग, सिंगापुर और दक्षिण पूर्व एशिया सहित कई देशों से धन जुटाने के लिए किया जा रहा है।
चर्चा के दौरान, आरबीआई के डिप्टी गवर्नर ने आश्वासन दिया कि केंद्रीय बैंक जमा राशि जुटाने और पात्र ऋणों को सुगम बनाने में बैंकों और वित्तीय संस्थानों को सक्रिय रूप से सहयोग दे रहा है । यह भी बताया गया कि आरबीआई द्वारा स्थापित सुदृढ़ दैनिक रिपोर्टिंग ढांचा भागीदार संस्थानों में प्रगति की पारदर्शी और वास्तविक समय की निगरानी को सक्षम बनाता है।
