ईरान के खिलाफ अमेरिका की नई जंग! क्या इस बार सुपरपावर का साथ दे रहे हैं अरब मुल्क?

अमेरिका ने ईरान के 140 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। इसके जवाब में ईरान ने कतर, कुवैत, बहरीन और यूएई में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाया है।

पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध का दायरा बहुत ही तेजी से बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। अमेरिका ने लगातार चौथे दिन ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर अपनी सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिका ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के ठिकानों पर जबरदस्त हमले किए हैं। इसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी के कई अरब देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।

इन बड़े हमलों की वजह से अब पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव अपने चरम स्तर पर पहुंच गया है। ईरानी सेना ने अरब मुल्कों में अमेरिकी बेस पर ड्रोन और मिसाइल से लगातार कई बड़े हमले किए हैं। ईरान ने आरोप लगाया है कि खाड़ी के अरब देश अमेरिका की इस युद्ध में काफी मदद कर रहे हैं। हालांकि इन सभी अरब देशों ने युद्ध में किसी भी तरह से शामिल होने से साफ इनकार किया है।

अमेरिकी सेना की बड़ी कार्रवाई
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक उनके ताजा सैन्य अभियान में ईरान के करीब 140 सैन्य ठिकानों पर हमले हुए हैं। इनमें मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट्स के साथ-साथ नौसैनिक अड्डे और हथियार भंडार भी पूरी तरह शामिल हैं। सेना का दावा है कि पिछले तीन दिनों में 300 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया गया है। यह कार्रवाई व्यापारिक जहाजों पर ईरान की हमले की क्षमता को कमजोर करने के लिए है।

ईरान का जबरदस्त पलटवार
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने भी अपनी जवाबी कार्रवाई बहुत तेज कर दी है और खाड़ी देशों को निशाना बनाया है। कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत में इमरजेंसी अलर्ट जारी कर लोगों को सावधान किया गया है। कतर की राजधानी दोहा में लोगों को घरों के भीतर रहने और खिड़कियों से काफी दूर रहने की सलाह दी गई। आसमान में इंटरसेप्टर मिसाइलों के धुएं के निशान और तेज धमाकों की आवाजें सुनाई दी हैं।

अरब मुल्कों पर बड़ा आरोप
ईरान ने आरोप लगाया है कि खाड़ी देश अमेरिका को अपने सैन्य अड्डों और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने दे रहे हैं। तेहरान का कहना है कि वह इन देशों के नागरिक इलाकों पर बिल्कुल भी हमला नहीं कर रहा है। वह सिर्फ उन सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बना रहा है जहां से ईरान पर जानलेवा हमले किए जा रहे हैं। ईरान की सेना ने कुवैत में रडार और पैट्रियट सिस्टम को उड़ाने का दावा किया है।

अरब देशों का साफ इनकार
अलजजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक कतर, बहरीन, कुवैत और यूएई ने ईरान के इन गंभीर आरोपों को सिरे से खारिज किया है। इन सभी देशों का स्पष्ट रूप से कहना है कि वे किसी भी युद्ध का हिस्सा बिल्कुल नहीं हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिका के साथ उनके सैन्य समझौते सिर्फ सुरक्षा और आपसी सहयोग के लिए किए गए हैं। इन समझौतों का उद्देश्य किसी भी अन्य देश के खिलाफ हमला करना बिल्कुल भी नहीं है।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चेतावनी
इस पूरे भारी संघर्ष का सबसे बड़ा केंद्र एक बार फिर महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट बन गया है जो व्यापार के लिए अहम है। ईरान ने इस रणनीतिक जलमार्ग को बंद रखने का बड़ा ऐलान करते हुए अमेरिका को अपनी सख्त चेतावनी दी है। ईरान ने कहा है कि उसकी इजाजत के बिना कोई जहाज यहां से गुजरा तो उसे कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। ईरान का दावा है कि बिना सहमति आवाजाही उसके राष्ट्रीय हितों के पूरी तरह खिलाफ है।

तेल और गैस सप्लाई पर संकट
अमेरिका का कहना है कि वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की पूरी सुरक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है। अमेरिकी सेना ने 800 से ज्यादा व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कराने में मदद की है। इनमें लगभग 40 करोड़ बैरल तेल और अन्य महत्वपूर्ण ऊर्जा संसाधनों का ट्रांसपोर्टेशन पूरी तरह शामिल है। अगर यह भारी टकराव ऐसे ही बढ़ता है तो दुनिया में वैश्विक तेल और गैस सप्लाई पर व्यापक असर पड़ेगा।

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