छोटे शहरों से झोला उठाकर उम्मीदों के सहारे चले

सतना:कभी प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक जिला होने के बावजूद वर्तमान में इस कगार में पहुंच गया है कि हर दिन रोजी रोजगार के लिए घर बार छोड़कर हजारों युवा पलायन करने के लिए मजबूर है। कुल मिलाकर वर्षो पहले एक फिल्मी गीत की कहानी सच साबित हो रही जिसमें कहा गया है कि हम तो छोटे-छोटे शहरों से झोला उठाकर चले जहाँ काम और रोजगार मिलेगा.

जिले में औद्योगिक पहचान होने के बावजूद स्थानीय युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसका असर यह है कि हर दिन बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब और दक्षिण भारत के विभिन्न शहरों की ओर जा रहे हैं। इनमें आईटीआई, पॉलीटेक्निक, स्नातक और अन्य तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवा भी शामिल हैं।

रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों की ओर जाने वाले युवाओं का सबसे अधिक असर जिले के रेलवे स्टेशन पर देखने को मिलता है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में युवा बैग और जरूरी सामान के साथ ट्रेनों का इंतजार करते नजर आते हैं। बड़े शहरों की ओर रोजगार की उम्मीद लेकर रवाना होते हैं।

रोजगार की तलाश में पलायन करने वालों में केवल कम पढ़े-लिखे युवा ही नहीं, बल्कि आईटीआई, पॉलीटेक्निक, स्नातक और अन्य तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवक भी शामिल हैं। शिक्षा और तकनीकी योग्यता होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में बेहतर आजीविका और भविष्य की उम्मीद में वे दूसरे शहरों और राज्यों का रुख करने को मजबूर हैं।
नियमित काम की कमी:अरुण
अरुण ने बताया कि जिले में नियमित रूप से काम नहीं मिल पाता। जब काम मिलता भी है तो मेहनत के अनुरूप मजदूरी नहीं दी जाती और भुगतान भी समय पर नहीं होता। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर काम में मेहनत अधिक है, लेकिन आय कम होने के कारण रोजी-रोटी के लिए दूसरे शहरों का रुख करना मजबूरी बन गया है।
यहाँ हाथ से वहाँ मशीन से काम:गजेंद्र
गजेंद्र ने बताया कि स्थानीय स्तर पर काम तो मिल जाता है, लेकिन अधिकांश कार्य मशीनों के बजाय श्रमिकों से कराया जाता है, जिससे शारीरिक मेहनत अधिक करनी पड़ती है। वहीं, दूसरे शहरों की कंपनियों में अधिकांश काम मशीनों से होता है और श्रमिकों की भूमिका मुख्य रूप से संचालन और निगरानी तक सीमित रहती है। ऐसे में बेहतर कार्य परिस्थितियों और आय की उम्मीद में युवा बाहर जाना पसंद कर रहे हैं।
काम मिलने के अवसर ज्यादा:राजवेंद्र
राजवेंद्र ने बताया कि बड़े शहरों में काम के कई मौके मिल जाते हैं। वहां अपनी पसंद और योग्यता के अनुसार काम चुना जा सकता है। जबकि यहां काम के अवसर कम हैं। उनका कहना है कि यहां की कई कंपनियों में नौकरी पाने के लिए पहचान की जरूरत पड़ती है। साथ ही, स्थानीय लोगों को भी कम काम दिया जाता है। इसी वजह से युवा रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों की ओर जा रहे हैं।
यहाँ योग्यता का मूल्यांकन नही:अनूप
अनूप ने बताया कि जिले में पढ़ाई और योग्यता के अनुसार रोजगार के अवसर बहुत कम हैं। यदि काम मिल भी जाता है, तो उसके हिसाब से वेतन नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि बाहर की कंपनियां बेहतर वेतन देने के साथ-साथ रहने और खाने की सुविधा भी उपलब्ध कराती हैं। इसी कारण कई युवा दूसरे शहरों में काम करना पसंद करते हैं

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