
जबलपुर। माढ़ोताल थाने के ठीक सामने 5 जुलाई को प्रभात नगर निवासी पूनाराम नोनिया (55) ने आत्महत्या के इरादे से खुद पर डीजल छिडक़कर आग लगा ली थी। इलाज के दौरान शनिवार को उसकी नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई ।मृतक ने यह आत्मघाती कदम थाने में सुनवाई नहीं होने से उठाया था। मौत के बाद आक्रोश भडक़ गया आज चुंगी नाका में आक्रोशिजनों ने चक्काजाम कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए और लोगों को समझाइश दी।
जानकारी के अनुसार पूनाराम नोनिया 55 वर्ष निवासी प्रभात नगर का मदर टेरेसा नगर में एक दुकान में खाली तेल के डब्बे खरीदने, बेचने का काम करता था। 5 जुलाई को माढ़ोताल थाने के सामने बनी राजेन्द्र राजपूत की चाय की दुकान पर गया था जहां वे काफी देर तक बैठा रहा। इसके बाद दोपहर लगभग 12 बजे वहां से उठने के बाद सीधे थाने के सामने सडक़ पर आया कोई कुछ समझ पाता इसके पहले ही उसने स्वयं के ऊपर डीजल छिडक़र खुद को आग के हवाले कर दिया था। जिसे उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। जहां उसकी इलाज के दौरान शनिवार को मौत हो गई। सूत्रों की माने तो मृतक को झूठी गवाही के जरिए एक मामले में फंसाया गया था। वे इन्ही लोगों पर कार्रवाई चाहता था लेकिन उसकी सुन वाई नहीं थी। जिसके चलते लंबे समय से असंतुष्ट और नाराज चल रहा था। थाने के चक्कर काट कर थक चुका था जिसके चलते उसने आत्महत्या करने का मन बना लिया था। जबकि टीआई वीरेन्द्र सिंह पवार का दावा है कि मृतक ने न ही कभी थाने में कभी कोई शिकायत, एफआईआर की थी और न ही कोई आवेदन दिया है और न ही वे कभी थाने आया। सीसीटीव्ही देख लिए गए है।
जांच में यह बात भी सामने आई है कि वर्ष 2001 में पूनाराम परिवार सहित दीनदयाल चौक स्थित झुग्गी बस्ती में रहता था इस दौरान उसने एक व्यक्ति को जिंदा जला दिया था । जिससे उसकी मौत हो गई थी। न्यायालय ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद वे जेल से रिहा हुआ था। परिवार के साथ कटनी में रहने लगा था और वह जबलपुर आकर एक दुकान में काम करता था। 2025 में उसका पारिवारिक विवाद भी सामने आया था जो थाने तक पहुंचा था।
