बहुराष्ट्रीय कंपनियों के वैश्विक क्षमता केंद्रों का गढ़ बन सकता है भारत, चार्टर्ड अकाउंटेंट उनका नेतृत्व करने की रखते हैं योग्यता: आईसीएआई अध्यक्ष

नयी दिल्ली, 11 जुलाई (वार्ता) भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्थान (आईसीएआई) के अध्यक्ष प्रसन्न कुमार डी. ने शनिवार को यहां कहा कि भारत बहुराष्ट्रीय कंपनियों के वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) का वैश्विक गढ़ बन सकता है और भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट ऐसे केंद्रों में नेतृत्व की भूमिकाएं निभाने की योग्यता रखते हैं।

श्री कुमार आईसीएआई ग्लोबल समिट 2026 देशव्यापी समिट श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित प्रारंभिक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। आईसीएआई की वैश्विक व्यापार एवं सेवा समिति की ओर से आयोजित इस सम्मेलन का केंद्रीय विषय भारत को जीसीसी के लिए विश्व का अग्रणी गंतव्य बनाना था। इस कार्यक्रम की मेजबानी आईसीएआई की उत्तरी भारतीय क्षेत्रीय परिषद ने की।

चार्टर्ड अकाउंटेट के पेशे के बढ़ते महत्व को रेखांकित करते हुए श्री कुमार ने कहा कि जो कार्य कभी केवल बैक-ऑफिस सहायता सेवाओं तक सीमित था, वह आज वित्त, लेखांकन, कराधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), साइबर सुरक्षा, डेटा विश्लेषण, ईएसजी रिपोर्टिंग, विधिक सेवाओं, कॉरपोरेट गवर्नेंस और व्यवसाय परिवर्तन जैसी उच्च-मूल्य सेवाओं वाले एक गतिशील पारिस्थितिकी तंत्र में बदल चुका है।

उन्होंने सम्मेलन के विषय के बारे में कहा, “भारत वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) का गढ़ बनने की विशिष्ट स्थिति में है और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के पास वह विशेषज्ञता तथा पेशेवर क्षमता है, जिसके बल पर वे विश्व स्तर पर जीसीसी का नेतृत्व कर सकते हैं तथा विकसित भारत 2047 की यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।”

इस अवसर पर आईसीएआई की वैश्विक व्यापार एवं सेवा समिति के अध्यक्ष संजीब सांघी ने कहा, “भारत में 2,100 से अधिक जीसीसी कार्यरत हैं, जो लगभग 23.6 लाख पेशेवरों को रोजगार प्रदान करते हैं और प्रतिवर्ष लगभग 100 अरब डॉलर का राजस्व अर्जित करते हैं। यह लेखांकन पेशे के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।”

उन्होंने कहा कि आईसीएआई ग्लोबल समिट मंच ज्ञान के आदान-प्रदान, विभिन्न उद्योगों के बीच सहयोग तथा नीतिगत संवाद का एक सशक्त माध्यम बनेगा, जो नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत, जीसीसी, शिक्षाविदों और लेखा पेशे से जुड़े विशेषज्ञों को एक साथ लाकर इस तेजी से विकसित हो रहे पारिस्थितिकी तंत्र के भविष्य को दिशा देगा।

आईसीएआई की एक विज्ञप्ति के अनुसार, उसकी ग्लोबल समिट श्रृंखला 2026 के तहत अहमदाबाद (24 जुलाई), मुंबई (16–17 अक्टूबर), बेंगलुरु (23–24 अक्टूबर), हैदराबाद (13–14 नवंबर), पुणे (21–22) नवंबर और चेन्नई (जनवरी- 2027) में इसी तरह के सम्मेलन आयोजित किये जाएंगे। इन सम्मेलनों में नीति-निर्माताओं, वैश्विक कंपनियों, उद्योग जगत, शिक्षाविदों तथा वित्तीय पेशेवरों को एक मंच पर लाकर उभरते अवसरों, नीतिगत सुधारों, तकनीकी प्रगति और जीसीसी के भविष्य पर विचार-विमर्श किया जायेगा।

दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम को सर्विसेज एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (एसईपीसी), इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (आईएफएससीए), नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू), नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएसडीसी) तथा आईआईएम संबलपुर का सहयोग प्राप्त है।

इस सम्मेलन में प्रतिष्ठित वक्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों ने वित्तीय नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं स्वचालन (एआई एवं आटोमेशन), डेटा की गोपनीयता, ईएसजी एवं सतत विकास, नैतिकता एवं सुशासन, लेखांकन एवं अनुपालन, साइबर सुरक्षा, प्रतिभा विकास, जीसीसी स्थापना एवं रणनीति, वैश्विक कराधान, मानव संसाधन एवं कार्यबल, विपणन रणनीति तथा प्रक्रिया परिवर्तन जैसे विषयों पर अपने व्यावहारिक अनुभव और भविष्य की रणनीतियां साझा कीं। उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने उभरती प्रौद्योगिकियों, बदलते नियामकीय ढांचे, भविष्य के लिए आवश्यक कौशलों और व्यवसाय परिवर्तन से संबंधित उपयोगी सुझाव प्रस्तुत किये जिससे उच्च-मूल्य सेवाओं के वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और मजबूत किया जा सके।

सम्मेलन का उद्घाटन श्री कुमार ने किया। इस अवसर पर आईसीएआई के पूर्व अध्यक्ष चरणजोत सिंह नंदा, आईसीएआई की केंद्रीय परिषद के सदस्य संजीव कुमार सिंघल तथा एनआईआरसी, आईसीएआई की अध्यक्ष नव्या मल्होत्रा और संस्थान के अन्य वरिष्ठ सदस्य तथा विशेषज्ञ उपस्थित थे।

संस्थान का कहना है कि जीसीसी पारिस्थितिकी तंत्र में आईसीएआई की बढ़ती भूमिका भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को वैश्विक व्यावसायिक मानकों और उभरती कौशल आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार कर उनकी पेशेवर गतिशीलता को सशक्त बनायेगी। लक्षित क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से आईसीएआई डिजिटल, विश्लेषणात्मक और अंतरराष्ट्रीय दक्षताओं से युक्त भविष्य-उन्मुख कार्यबल तैयार कर रहा है।

इससे वैश्विक रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, ज्ञान का आदान-प्रदान होगा तथा भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक पहचान मिलेगी।

संस्थान वित्त, ऑडिट, कराधान और परामर्श सेवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करके अन्य देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय सेवा व्यापार को प्रोत्साहन देगा, बाजारों के एकीकरण को प्रोत्साहित करेगा, अनुपालन संबंधी बाधाओं को कम करेगा तथा उच्च-मूल्य पेशेवर सेवाओं के विश्वसनीय वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगा।

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