नयी दिल्ली, 11 जुलाई (वार्ता) केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने शनिवार को बताया कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के औपचारिकीकरण (पीएम एफएमई) योजना के अंतर्गत दो लाख से अधिक सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों में 20,300 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश को प्रोत्साहन मिला है और उद्यमों ने रोजगार सृजन के मामले में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की हैं।
श्री पासवान ने इस योजना की सफलता को उजागर करने के लिए राजधानी में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा, ‘ दो लाख से अधिक ऋण स्वीकृतियों के साथ इस योजना के माध्यम से 20,300 करोड़ रुपये से अधिक के परियोजना निवेश को प्रोत्साहन मिला है।” उन्होंने कहा कि योजना के लगभग 90 प्रतिशत लाभार्थी प्रथम पीढ़ी के उद्यमी हैं तथा 44 प्रतिशत महिलाएं हैं।
वहीं, 75,000 से अधिक पीएम एफएमई समर्थित उद्यम आधार, उद्यम सहायता, एफएसएसएआई तथा जीएसटी जैसे पंजीकरणों के माध्यम से औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बने हैं। इस योजना से लगभग 11 लाख प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। श्री पासवान ने कहा कि दो लाख लाभार्थियों का आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि सरकार की परिकल्पना पूरे देश में ठोस परिणामों में बदल रही है। उन्होंने कहा कि लगभग 44 प्रतिशत महिला लाभार्थियों की भागीदारी ‘महिला-नेतृत्व वाले विकास’ की वास्तविक भावना को दर्शाती है, जो ‘विकसित भारत’ की आधारशिला है।
कार्यक्रम में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा विभिन्न राज्य सरकारों, सहयोगी मंत्रालयों, बैंकिंग संस्थानों, विकास सहयोगियों, उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों तथा किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने योजना की उपलब्धियों पर आधारित प्रमुख प्रकाशनों का विमोचन किया गया। इसके साथ ही लाभार्थी उद्यमियों ने अपनी सफलता की कहानियां साझा कीं तथा मंत्री ने पीएमएफएमई लाभार्थियों से संवाद कर योजना के जमीनी प्रभाव को जाना। विभाग के सचिव ए. पी. दास जोशी ने कहा कि यह उपलब्धि भारत के सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र के उभरने का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि पीएमएफएमई योजना वित्त, औपचारिककरण, प्रौद्योगिकी, क्षमता निर्माण और बाजार तक पहुंच को एकीकृत कर उद्यम विकास का समग्र मॉडल प्रस्तुत करती है। उन्होंने योजना के जिला संसाधन व्यक्तियों के नेटवर्क की भी सराहना करते हुए कहा कि उनका कार्य डिजिटल इंडिया और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के सफल समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। स्वागत भाषण में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव देवेश देवल ने देशव्यापी मल्टीमीडिया जन-जागरूकता अभियान के शुभारंभ की घोषणा करते हुए कहा कि पीएमएफएमई योजना सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, मार्गदर्शन, ब्रांडिंग, विपणन तथा बाजार से जोड़ने तक सम्पूर्ण सहयोग प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि “पीएमएफएमई केवल उद्यमों का समर्थन नहीं कर रही है, बल्कि आजीविकाओं में परिवर्तन, स्थानीय मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने तथा पूरे देश में टिकाऊ रोजगार के अवसर सृजित करने का कार्य कर रही है।”
अधिकारियों ने योजना के ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ओडीओपी) दृष्टिकोण पर भी प्रकाश डाला। इसके तहत लगभग 200 उत्पादों को शामिल करते हुए 40 साझा ब्रांडों को समर्थन दिया गया है, जिनके माध्यम से मखाना, मोटे अनाज (मिलेट्स), मसाले और जीआई टैग प्राप्त उत्पादों जैसे स्थानीय उत्पादों की मूल्य श्रृंखलाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। खाद्य प्रसंस्करण मंत्री ने बिहार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश जैसे अग्रणी राज्यों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक जश्न मनाने योग्य पड़ाव नहीं है, बल्कि भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के अगले विकास चरण की मजबूत नींव है।
उन्होंने राज्य सरकारों, जिला प्रशासन और क्षेत्रीय अधिकारियों की भी प्रशंसा की, जिन्होंने राष्ट्रीय नीति को जमीनी स्तर पर उद्यम विकास के जनआंदोलन में परिवर्तित किया। मंत्री ने योजना के सीड कैपिटल समर्थन का भी उल्लेख किया, जिसके अंतर्गत 4.18 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सदस्यों को सहायता प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त मंत्रालय द्वारा 27 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 80 कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 32 केंद्र शुरू हो चुके हैं। योजना के अंतर्गत 1.76 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें 77 प्रतिशत महिलाएं हैं। कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने रांची (झारखंड) के श्री इंदरजीत सिंह, जो योजना के दूसरे लाखवें लाभार्थी हैं, को सम्मानित करते हुए उन्हें ऋण स्वीकृति पत्र और प्रमाण-पत्र प्रदान किया।

