सोहागपुर। पुराने थाने के पीछे काली मंदिर परिसर में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में हजारों की संख्या में सनातनी माताएं बहनें उपस्थित रहीं। काली मंदिर स्थित परिसर में गायत्री जी का पूजन एवं हवन का आयोजन किया गया । खेड़ापति माता मंदिर से विशाल कलश यात्रा निकाली गई जो की बिहारी चौक से होते हुए कमानिया गेट, श्रीराम चौराहे से काली मंदिर पर पहुंचकर संपन्न हुई । इसके बाद मंचीय कार्यक्रम हुआ है जिसमें सतीश चौकसे विभाग शारीरिक प्रमुख, महंत हरकिशन दास महाराज, कार्यक्रम के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह चौधरी चित्रा तिवारी स्वामी आलोक जैन , कन्नूलाल अग्रवाल मंचासीन थे। जिनका समिति की ओर से स्वागत किया गया जिसके बाद सरस्वती वंदना की गई।
विराट हिंदू सम्मेलन की भूमिका प्रस्तावना अधिवक्ता शिवकुमार पटेल ने रखी। महंत हरकिशन दास ने कहा कि जब-जब हिंदू आबादी घटी है बांग्लादेश हो या पाकिस्तान हो वहां पर हिंदुओं पर अत्याचार हुआ है ऐसी घटनाओं से बचने के लिए समस्त हिंदुओं को संगठित होना परम आवश्यक है। चित्रा तिवारी ने कहा संस्कारों का जीवन में बहुत महत्व है यह संस्कार किसी स्कूल में नहीं सिखाई जाति और ना ही किसी किताब से इन्हें सीखा जा सकता है संस्कारों को बच्चा अपने माता-पिता या परिवार से सीखना है। शिक्षा के साथ जब बच्चों में संस्कार होते हैं तो वह निरंतर आगे बढ़ता जाता है। मुख्य वक्ता के रूप में सतीश चौकसे ने कहा इतिहास साक्षी है हम कभी भी मुगलो के सामने नहीं झुके, हिंदू समाज पर अत्याचार हुआ परंतु अत्याचार का पुर जोड़ प्रतिरोध भी किया है। हिंदू कभी भी डरा हुआ नहीं था हमारे वीर सपूतों ने इस सनातन की रक्षा के लिए इस राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है छत्रपति शिवाजी महाराज महाराणा प्रताप जैसे अनेकों वीर सपूतों ने इस धरा पर जन्म लिया है। यह धरती वीर सपूतों के रूप में जानी जाती है। अतिथियों के उद्बोधन के पश्चात भंडारे का कार्यक्रम आरंभ हुआ।
कार्यक्रम में विधायक ठाकुर विजयपाल सिंह, राजो मालवीय, नन्हू छाबड़िया, अश्विनी सरोज आकाश रघुवंशी यशवंत पटेल राजेंद्र सिंह चौधरी, बालपुरी गोस्वामी, समाजसेवी कृष्ण कुमार पालीवाल, राजेंद्र पालीवाल, पूर्व पार्षद संजय तिवारी, नीलेश खंडेलवाल, अधिवक्ता शिवकुमार पटेल, रितेंद्र राजपूत, भरत तिवारी अभिषेक चौहान, मृणाल घरामी ,शरद चौरसिया, मनोज अग्रवाल, बाबू भाई मेहरा ,मनोनीत हलदार, प्रकाश मंडल ,उत्तम घरामी, उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन हेमंत बालाजी ने किया
