सतना : जिले में ग्रीष्मकालीन मूंग की समर्थन मूल्य पर शुरू हुई खरीदी योजना किसानों के लिए राहत के बजाय आफत साबित हो रही है। सरकार से उचित दाम मिलने की उम्मीद में भारी लागत लगाकर मूंग की खेती करने वाले किसानों में अब सरकार की नीतियों को लेकर भारी नाराजगी है।समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी योजना जिले के किसानों के लिए राहत से ज्यादा चिंता का विषय बन गई है। सरकार ने समर्थन मूल्य पर खरीदी की घोषणा तो की, लेकिन खरीदी केंद्रों पर उनकी कुल उपज का केवल 25 प्रतिशत हिस्सा ही लिया जा रहा है। ऐसे में बाकी फसल किसानों को खुले बाजार में कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती में सिंचाई, उन्नत बीज, खाद, कीटनाशक और मजदूरी पर प्रति एकड़ हजारों रुपए खर्च किए गए। औसतन तीन क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन होने के बावजूद समर्थन मूल्य पर केवल एक क्विंटल ही खरीदा जा रहा है। जब फसल का पंजीयन, गिरदावरी और सत्यापन शासन के नियमों के अनुसार हुआ है, तो वास्तविक उत्पादन के अनुरूप खरीदी क्यों नहीं की जा रही।
खरीदी केंद्रों पर किसानों में इस व्यवस्था को लेकर नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। यदि अधिकांश उपज बाजार में औने-पौने दाम पर बेचनी पड़े, तो समर्थन मूल्य योजना का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है।भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष योगेश तिवारी ने बताया कि ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द की खरीदी में आ रही समस्याओं को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि मूंग की खरीदी सीमा 1.25 क्विंटल प्रति एकड़ तय की गई है, जबकि वास्तविक उत्पादन 4 से 5 क्विंटल प्रति एकड़ होता है। किसान संघ ने खरीदी सीमा बढ़ाकर 5 क्विंटल प्रति एकड़ करने की मांग की है।
इस संबंध में जिला विपणन अधिकारी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि शासन के निर्देशों के अनुसार ही समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीदी की जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 25 प्रतिशत खरीदी के निर्देश प्राप्त हैं और उसी के आधार पर उपार्जन किया जा रहा है
